डिंडौरी में रस्सी पर बच्ची के हैरतअंगेज करतब, साहस देख दंग रह गए लोग
मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिला मुख्यालय स्थित उत्कृष्ट विद्यालय के समीप शनिवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने राहगीरों के कदम रोक दिए। यहां महज 12 साल की एक बच्ची ने सड़क किनारे बंधी रस्सी पर मौत को मात देते हुए ऐसे करतब दिखाए कि हर कोई उसकी प्रशंसा करने लगा। बच्ची ने बांस के डंडे के सहारे हवा में बंधी रस्सी पर न केवल अद्भुत संतुलन बनाया, बल्कि घुटनों के बल चलकर और साइकिल की रिंग के साथ कलाबाजी दिखाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
प्रदर्शन के दौरान एक पल ऐसा भी आया जब संतुलन बिगड़ने से बच्ची रस्सी से नीचे गिर गई, लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने तुरंत उठकर दोबारा रस्सी पर चढ़ाई की और अपने प्रदर्शन को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने बच्ची के जज्बे और हौसले की जमकर तारीफ की।
छत्तीसगढ़ के नट परिवार की संघर्ष भरी कहानी
इस साहसी बच्ची का परिवार मूल रूप से छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के सिलयारी गांव का रहने वाला है। इस दौरान बच्ची के साथ उसका भाई रामा नट और भाभी निशा नट मौजूद थे। परिवार के सदस्यों ने बताया कि वे पिछले दो महीने से घर से बाहर हैं और अलग-अलग शहरों में जाकर अपना हुनर दिखाते हैं। इस मेहनत से उन्हें रोजाना 1500 से 2000 रुपये तक की आमदनी हो जाती है, जिससे उनका गुजारा चलता है।
- परिवार का ठिकाना: सिलयारी गांव, जिला रायगढ़, छत्तीसगढ़।
- दैनिक कमाई: लगभग 1500 से 2000 रुपये।
- कला का आधार: पुश्तैनी पेशा जिसे मजबूरी में अपनाया।
कोरोना काल ने छीनी जमीन, मजबूरी बना यह हुनर
अपनी आपबीती सुनाते हुए रामा नट ने बताया कि यह कला उनका पुश्तैनी पेशा तो है, लेकिन आज यह उनकी मजबूरी बन गई है। कोरोना महामारी के कठिन दौर में परिवार पर भारी कर्ज हो गया था, जिसे चुकाने के लिए उन्हें अपनी एक एकड़ उपजाऊ जमीन तक बेचनी पड़ी। रोजी-रोटी का कोई अन्य साधन न बचने के कारण उन्हें गांव छोड़कर दर-दर भटकने पर मजबूर होना पड़ा।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| बच्ची की उम्र | 12 वर्ष |
| मुख्य संघर्ष | कर्ज के कारण जमीन बिकना |
| वर्तमान स्थिति | शहरों में करतब दिखा कर पेट पालना |
रामा नट ने बताया कि उनकी 12 साल की बहन बचपन से ही इस कठिन कला का अभ्यास कर रही है। आज यही जानलेवा करतब उनके परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया बनकर रह गया है।
