GPS से होगी ग्वालियर नगर निगम के वाहनों की निगरानी, फ्यूल की भी होगी ट्रैकिंग

ग्वालियर नगर निगम अब अपने सरकारी वाहनों के संचालन को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। निगम के स्वच्छता, जल प्रदाय, अग्निशमन, निर्माण, सीवरेज और परिवहन विभाग में तैनात वाहनों में जल्द ही अत्याधुनिक जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और फ्यूल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इन उपकरणों को ई-नगर पालिका 2.0 के…

ग्वालियर नगर निगम के वाहनों पर अब तकनीक की नजर, जीपीएस और फ्यूल मॉनिटरिंग सिस्टम से होगी निगरानी

ग्वालियर नगर निगम अब अपने सरकारी वाहनों के संचालन को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। निगम के स्वच्छता, जल प्रदाय, अग्निशमन, निर्माण, सीवरेज और परिवहन विभाग में तैनात वाहनों में जल्द ही अत्याधुनिक जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और फ्यूल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इन उपकरणों को ई-नगर पालिका 2.0 के फ्लीट मैनेजमेंट मॉड्यूल से जोड़ा जाएगा, ताकि मुख्यालय से ही वाहनों की लाइव लोकेशन और ईंधन की खपत पर बारीक नजर रखी जा सके।

प्रदेश के सभी निकायों में अनिवार्य हुई नई व्यवस्था

नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने जानकारी दी कि नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय, भोपाल द्वारा जारी निर्देशों के तहत राज्य के सभी नगरीय निकायों के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता लाना और ईंधन के अनावश्यक खर्च पर लगाम कसना है।

प्रमुख सुविधाविवरण
जीपीएस ट्रैकिंगवाहन की लाइव लोकेशन और रूट की निगरानी।
फ्यूल मॉनिटरिंगईंधन भरने, निकासी और खपत का रियल-टाइम डेटा।
सेंट्रलाइज्ड सिस्टमई-नगर पालिका 2.0 से सीधे जुड़ाव।

ईंधन की हर गतिविधि का होगा डिजिटल रिकॉर्ड

नई तकनीक के तहत वाहनों के फ्यूल टैंक में विशेष सेंसर लगाए जाएंगे। ये सेंसर ईंधन के स्तर में होने वाले हर छोटे बदलाव को रिकॉर्ड करेंगे। इसमें ईंधन डलवाने से लेकर खपत तक की पूरी रिपोर्ट डिजिटल रूप में उपलब्ध होगी, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। यह डेटा सीधे ई-नगर पालिका 2.0 के फ्लीट मैनेजमेंट मॉड्यूल पर अपडेट होगा, जिससे उच्चाधिकारी किसी भी समय इसकी समीक्षा कर सकेंगे।

इन समस्याओं पर लगेगी रोक

  • ईंधन चोरी: सेंसर के जरिए फ्यूल की चोरी और लीकेज पर पूरी तरह नियंत्रण रहेगा।
  • दुरुपयोग पर अंकुश: जीपीएस के माध्यम से यह सुनिश्चित होगा कि सरकारी वाहन केवल निर्धारित कार्यों के लिए ही इस्तेमाल हो रहे हैं।
  • कार्यक्षमता में सुधार: वाहनों के रूट और समय की निगरानी से निगम की सेवाओं में तेजी आएगी।
  • जवाबदेही तय: सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ने के कारण वाहन प्रबंधन अधिक जवाबदेह बनेगा।

नगर निगम प्रशासन का मानना है कि इस नई तकनीकी पहल से न केवल सरकारी खजाने की बचत होगी, बल्कि निगम की कार्यशैली में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। भविष्य में यह सिस्टम वाहनों के रखरखाव और उनकी उम्र का आकलन करने में भी सहायक साबित होगा।