झाबुआ में खूनी रंजिश: दहशत में 116 लोगों का परिवार, स्कूल छोड़ने को मजबूर हुए बच्चे
मेरी पढ़ाई छूट गई है, मुझे तो यह भी याद नहीं कि मैं किस कक्षा में थी। स्कूल जाने से ज्यादा जरूरी है हमारा जिंदा रहना। अगर मैं बाहर निकली तो वे लोग मुझे मार डालेंगे। 16 वर्षीय रीना की आंखों में आंसू और जुबान पर ये शब्द उस खौफ को बयां कर रहे हैं, जिसमें झाबुआ जिले के सालेड़ा फलिया का एक पूरा कुनबा जी रहा है। केवल रीना ही नहीं, बल्कि उसके परिवार के 20 बच्चे अपनी जान बचाने के लिए शिक्षा से दूर हो गए हैं।
पूरा परिवार इस समय गहरी दहशत में है। परिवार के पुरुष सदस्य अपनी जान बचाने के लिए दूसरे गांवों में छिपे हुए हैं, जबकि महिलाएं और बच्चे अपने घर और 150 एकड़ जमीन वापस पाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। हालांकि गांव में पुलिस का पहरा है, लेकिन पीड़ित परिवार खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करता। आखिर 116 लोगों का यह परिवार किस खौफ के साये में जी रहा है? जानने के लिए भास्कर की टीम झाबुआ जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर सालेड़ा फलिया पहुंची।
17 मई 2019: शादी की खुशियां बदलीं मातम में
इस पूरे विवाद की जड़ सात साल पुरानी एक दुखद घटना है। 17 मई 2019 को गांव में एक शादी समारोह के दौरान डीजे बजाने को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ, जो देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया। इस घटना में वक्का भूरिया की हत्या कर दी गई। हत्या का आरोप दूसरे पक्ष के लोगों पर लगा, जिसके बाद पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया। अदालत ने इन सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई। करीब सात साल बीतने के बाद आठ आरोपी अब जमानत पर बाहर हैं, जबकि एक की जेल में मौत हो चुकी है।
घर ढहाए और जमीन पर किया कब्जा
हत्या की घटना के बाद पीड़ित पक्ष के करीब 20 घरों को ढहा दिया गया। आरोप है कि हमलावरों ने घरों में रखा अनाज लूट लिया, मवेशी छीन लिए और परिवार की 150 बीघा उपजाऊ जमीन पर कब्जा कर लिया। उस समय घर के पुरुष जेल में थे, इसलिए महिलाएं और बच्चे जान बचाकर गुजरात की ओर भाग गए थे।
विवाद का मुख्य कारण
- जमानत के बाद वापसी: एक साल पहले आरोपी पक्ष के लोग जेल से बाहर आए।
- रकम की मांग: पीड़ित परिवार का दावा है कि विरोधी पक्ष गांव में बसने के बदले 25 लाख रुपए की मांग कर रहा है।
- पुलिस सुरक्षा: 18 जून को एसपी ऑफिस के घेराव के बाद प्रशासन ने पुलिस सुरक्षा में परिवार को गांव पहुंचाया।
पुलिस सुरक्षा पर सवाल: क्या पर्याप्त है इंतजाम?
प्रशासन ने पीड़ित परिवार को गांव तो पहुंचा दिया, लेकिन सुरक्षा का दायरा धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। शुरुआत में जहां 25 से अधिक जवान तैनात थे, वहीं अब केवल 5-6 जवान ही तैनात हैं। बुजुर्ग महिला राजू भूरिया का कहना है, ‘अगर हमारे घर के पुरुषों ने गलती की थी, तो कानून उन्हें सजा दे रहा है। फिर हमें क्यों प्रताड़ित किया जा रहा है? पुलिस की मौजूदगी में भी हम पर पत्थर और शराब की बोतलें फेंकी जाती हैं।’
| सुविधा | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| बिजली | लाइन काट दी गई है, परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर। |
| पानी | हैंडपंप का उपयोग करने नहीं दिया जाता, 1200 रु में टैंकर मंगाना पड़ रहा। |
| सुरक्षा | केवल 5-6 पुलिसकर्मी, दिन में एक महिला कांस्टेबल। |
सुलगता तनाव और प्रशासन का रुख
परिवार के युवक नूरा ने बताया कि वे आज भी अपनी लोकेशन छिपाकर रह रहे हैं और पुलिस वाहनों के जरिए राशन मंगवा रहे हैं। स्थिति यह है कि खेत पर जाने वाली महिलाओं के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आ रही हैं। वहीं, झाबुआ एसपी देवेंद्र पाटीदार का कहना है कि यह विवाद एक ही परिवार के चचेरे भाइयों के बीच है। पुलिस लगातार दोनों पक्षों से संवाद कर सामंजस्य बिठाने की कोशिश कर रही है ताकि भविष्य में किसी बड़ी हिंसक घटना को टाला जा सके।









