Fraud: दोस्त ने कारोबारी को 46 लाख का चूना लगाया, फर्जी रजिस्ट्री से ठगी।

ग्वालियर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 20 साल पुरानी दोस्ती की आड़ में एक व्यापारी को करोड़ों का चूना लगाने की साजिश रची गई। आरोपियों ने बैंक नीलामी का झांसा देकर न केवल फर्जी दस्तावेज तैयार किए, बल्कि नकली बैंक अधिकारी बनकर पीड़ित से 46.40…

ग्वालियर में दोस्ती के नाम पर बड़ा फ्रॉड: बैंक नीलामी के बहाने कारोबारी से ठगे 46.40 लाख रुपये

ग्वालियर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 20 साल पुरानी दोस्ती की आड़ में एक व्यापारी को करोड़ों का चूना लगाने की साजिश रची गई। आरोपियों ने बैंक नीलामी का झांसा देकर न केवल फर्जी दस्तावेज तैयार किए, बल्कि नकली बैंक अधिकारी बनकर पीड़ित से 46.40 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि ऐंठ ली। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मुख्य आरोपी समेत अन्य के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

ऐसे रची गई ठगी की पूरी साजिश

पुलिस के अनुसार, डीडी नगर निवासी रामअवतार सिंह राठौड़ की भिंड के रहने वाले कृष्ण गोपाल सिंह उर्फ अनिल श्रीवास से दो दशक पुरानी दोस्ती थी। इसी भरोसे का फायदा उठाकर कृष्ण गोपाल और उसकी पत्नी सरिता श्रीवास ने रामअवतार को शताब्दीपुरम में 80 लाख रुपये में प्लॉट दिलाने का लालच दिया। शुरुआत में पीड़ित ने 7 लाख रुपये एडवांस देकर एग्रीमेंट भी कर लिया, लेकिन असली ठगी का खेल इसके बाद शुरू हुआ।

फर्जी बैंक अधिकारी और नकली दस्तावेजों का जाल

आरोपियों ने पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए एक पूरी टीम तैयार की थी। उन्होंने कुछ लोगों को बैंक और सरकारी विभागों का अधिकारी बताकर पीड़ित से मिलवाया। ठगी का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

आरोपी का नाम बताई गई भूमिका
अमित श्रीवास एचडीएफसी बैंक फील्ड ऑफिसर
विनय शर्मा और धर्मवीर सिंह बैंक मैनेजर
रामगोपाल राजोरिया हाउसिंग बोर्ड अधिकारी

इस गिरोह ने एचडीएफसी बैंक के फर्जी लेटरहेड, जाली मुहरें और कूटरचित रसीदें थमाकर पीड़ित से किश्तों में कुल 39.40 लाख रुपये और वसूल लिए। इस तरह कुल 46.40 लाख रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।

जांच में हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

  • जब पीड़ित ने रजिस्ट्री के लिए दबाव बनाया, तो आरोपी टालमटोल करने लगे।
  • शक होने पर रामअवतार ने ग्वालियर विकास प्राधिकरण (GDA) और एचडीएफसी बैंक में पड़ताल की।
  • जांच में पता चला कि ई-रजिस्ट्री पूरी तरह फर्जी थी और जिन लोगों को बैंक अधिकारी बताया गया था, वे बैंक के कर्मचारी ही नहीं थे।

पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों की तलाश

सच्चाई सामने आने पर जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी और फरार हो गए। महाराजपुरा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की टीम अब आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है।


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