उमरिया में डीएपी खाद का संकट: किसानों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
उमरिया जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही खाद की भारी किल्लत ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बाजार में डीएपी (DAP) खाद की अनुपलब्धता के चलते किसानों को बुवाई के लिए मजबूरन महंगी एनपीके (NPK) खाद खरीदनी पड़ रही है। इससे न केवल किसानों का कृषि बजट बिगड़ गया है, बल्कि खेती की लागत में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
स्थानीय किसानों के अनुसार, डीएपी खाद की एक बोरी आमतौर पर 1300 से 1400 रुपए में उपलब्ध हो जाती थी। लेकिन अब डीएपी न मिलने की स्थिति में उन्हें एनपीके खाद के लिए 1900 से लेकर 2400 रुपए प्रति बोरी तक खर्च करने पड़ रहे हैं। यह समस्या केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा उमरिया जिला इसकी चपेट में है, जिससे अन्नदाताओं में भारी रोष व्याप्त है।
खाद की कीमतों में अंतर
| खाद का प्रकार | औसत कीमत (प्रति बोरी) |
|---|---|
| डीएपी (DAP) | 1300 – 1400 रुपए |
| एनपीके (NPK) | 1900 – 2400 रुपए |
किसानों की मांग और विभाग का पक्ष
युवा किसान राजर्षि मिश्रा ने इस संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार को सभी सेवा सहकारी समितियों में डीएपी (18:46) का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी आर्थिक क्षमता और भूमि की आवश्यकता के अनुसार खाद चुनने का विकल्प मिलना चाहिए। केवल एक विकल्प पर निर्भर रहने से न केवल किसानों की जेब पर असर पड़ता है, बल्कि फसल उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- सहकारी समितियों में पर्याप्त स्टॉक की मांग।
- किसानों को खाद के दोहरे विकल्प मिलने की आवश्यकता।
- बढ़ती लागत से छोटे किसानों का कृषि बजट प्रभावित।
क्या कहना है कृषि विभाग का?
इस पूरे मामले पर कृषि विभाग के अधिकारी आर.एन. सिंह परिहार ने सफाई दी है। उन्होंने बताया कि जिले में डीएपी का रैक न लग पाने के कारण यह अस्थायी संकट उत्पन्न हुआ है। विभाग की ओर से उच्च अधिकारियों को लगातार पत्र लिखकर सप्लाई बहाल करने की मांग की जा रही है। परिहार ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि एनपीके खाद भी फसलों के लिए काफी फायदेमंद है। विभाग को पूरी उम्मीद है कि जल्द ही डीएपी की नई खेप जिले में पहुंचेगी और किसानों को इस महंगाई से राहत मिलेगी।
