मंडला: जर्जर स्कूल भवन बना जान का खतरा, बच्चों को घास-फूस की झोपड़ी में पढ़ने की मजबूरी
मध्य प्रदेश के मंडला जिले में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मवई विकासखंड की ग्राम पंचायत कोंडिया माल स्थित यूईजीएस प्राथमिक शाला कोड़िया में पढ़ने वाले नन्हे बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं। स्कूल का सरकारी भवन इतना जर्जर हो चुका है कि उसकी छत कभी भी ढह सकती है। ऐसे में मासूमों की सुरक्षा को देखते हुए ग्रामीणों ने खुद आगे आकर लकड़ी और पन्नी की मदद से एक अस्थायी झोपड़ी बनाई है, जहां अब बच्चों की कक्षाएं लग रही हैं।
अधिकारियों की अनदेखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने स्कूल की इस दयनीय स्थिति के बारे में स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत दी, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। स्थिति तब और बिगड़ गई जब पिछले साल बच्चों को एक किराये के भवन में शिफ्ट किया गया था, लेकिन किराया न चुकाने के कारण वह व्यवस्था भी ठप हो गई।
प्रशासन ने समाधान के तौर पर बच्चों को दूसरे गांव के स्कूल में जाने की सलाह दी, जिसे ग्रामीणों ने सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि छोटे बच्चों के लिए रोजाना इतनी दूर पैदल जाना न केवल मुश्किल है, बल्कि असुरक्षित भी है। थक-हारकर ग्रामीणों ने खुद श्रमदान कर एक हफ्ते के भीतर यह अस्थायी झोपड़ी तैयार की ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो।
मंडला में 580 स्कूलों की स्थिति चिंताजनक
इस मामले पर जिला शिक्षा केंद्र के समन्वयक अशोक शुक्ला ने स्वीकार किया कि जिले में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। उन्होंने जो आंकड़े साझा किए हैं, वे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं:
- कुल जर्जर स्कूल: जिले में करीब 580 ऐसे विद्यालय हैं जिन्हें तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है।
- प्रस्तावित बजट: कोड़िया स्कूल के पूर्ण कायाकल्प के लिए सरकार को 2.93 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।
- तत्काल राहत: स्कूल के एक कमरे की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है, जिसे एक सप्ताह के भीतर पूरा करने का दावा किया गया है।
मरम्मत कार्यों की वर्तमान स्थिति
| कार्य का विवरण | स्थिति |
|---|---|
| कोड़िया स्कूल एक कमरा मरम्मत | कार्य प्रगति पर (1 सप्ताह में पूर्ण) |
| संपूर्ण भवन जीर्णोद्धार | 2.93 लाख रुपये का प्रस्ताव लंबित |
| जिले में कुल मरम्मत योग्य स्कूल | 580 |
फिलहाल, ग्रामीणों की मेहनत से बनी यह झोपड़ी ही बच्चों का एकमात्र सहारा है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग कब तक बजट जारी कर इन बच्चों को पक्की छत के नीचे सुरक्षित पढ़ाई का माहौल मुहैया करा पाता है।










