Mandsaur: पशुपतिनाथ मंदिर की दान पेटी में निकले 31 लाख, विदेशी नोट भी मिले

विश्व प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का सिलसिला लगातार जारी है। मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा हाल ही में दो दिनों तक चली दान पेटियों की गणना में भारी मात्रा में नकद राशि और कीमती आभूषण प्राप्त हुए हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए की गई इस गणना में कुल 31 लाख…

पशुपतिनाथ मंदिर की दान पेटियों से निकला खजाना: 31 लाख से अधिक की नकदी और विदेशी मुद्रा प्राप्त

विश्व प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का सिलसिला लगातार जारी है। मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा हाल ही में दो दिनों तक चली दान पेटियों की गणना में भारी मात्रा में नकद राशि और कीमती आभूषण प्राप्त हुए हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए की गई इस गणना में कुल 31 लाख 40 हजार 20 रुपये की नकदी जमा हुई है।

मंदिर समिति के आंकड़ों के अनुसार, 15 जुलाई को पहले दिन की गणना में 24 लाख 2 हजार 450 रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि 16 जुलाई को दूसरे दिन 7 लाख 37 हजार 570 रुपये की राशि दान पेटियों से निकली। नकदी के अलावा, मंदिर को श्रद्धालुओं से 8 ग्राम सोने के आभूषण और 190 ग्राम चांदी की सामग्री भी भेंट स्वरूप प्राप्त हुई है, जो भगवान के प्रति भक्तों के समर्पण को दर्शाती है।

दान में मिली विदेशी मुद्रा

भगवान पशुपतिनाथ की ख्याति अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल चुकी है, जिसका प्रमाण दान पेटियों में मिली विदेशी मुद्रा है। प्राप्त विदेशी मुद्रा का विवरण निम्नलिखित है:

देशप्राप्त मुद्रा
मलेशिया20 और 5 सेंट के सिक्के
नेपाल2 रुपये के सिक्के और 100 व 5 मूल्य के नोट
यूएई1 सिक्का
थाईलैंड2 मूल्य का सिक्का
कजाकिस्तान1 मूल्य का सिक्का
ब्राजील2 मूल्य का नोट

वर्ष 2026 में दान का पूरा लेखा-जोखा

मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक चार चरणों में दान पेटियों की गणना संपन्न हो चुकी है, जिसमें कुल 1 करोड़ 3 लाख 60 हजार 40 रुपये का दान प्राप्त हुआ है। महीनेवार दान का विवरण इस प्रकार है:

  • जनवरी: 25 लाख 43 हजार 350 रुपये
  • मार्च: 24 लाख 27 हजार 670 रुपये
  • मई: 22 लाख 31 हजार रुपये
  • जुलाई: 31 लाख 40 हजार 20 रुपये

मंदिर समिति का मानना है कि विदेशी मुद्रा का बड़ी मात्रा में मिलना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भगवान पशुपतिनाथ के प्रति न केवल देश बल्कि विदेश में बसे श्रद्धालुओं की भी गहरी श्रद्धा है। मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिल रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विस्तार को बढ़ावा मिल रहा है।