टीकमगढ़ में मानसून की सुस्ती: औसत से 29 इंच कम बारिश, किसानों की उम्मीदें बरकरार
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम का मिजाज बदला और करीब 40 मिनट तक हुई तेज बारिश ने लोगों को गर्मी से राहत दी। जिले में इस दौरान औसतन 1.3 इंच बारिश दर्ज की गई, जिससे कई इलाकों में जलभराव की स्थिति भी उत्पन्न हो गई। हालांकि, यह राहत जिले में चल रहे सूखे जैसे हालातों को पूरी तरह बदलने के लिए नाकाफी साबित हो रही है।
बारिश का तुलनात्मक आंकड़ा और तहसीलवार स्थिति
आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल मानसून की रफ्तार काफी धीमी रही है। 18 जुलाई तक जिले में कुल 8.2 इंच औसत वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में हुई 37.5 इंच बारिश की तुलना में 29 इंच कम है। तहसीलवार बारिश का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| तहसील | पिछले 24 घंटों में बारिश |
|---|---|
| टीकमगढ़ | 60 मिमी (2 इंच) |
| बल्देवगढ़ | 49 मिमी (2 इंच) |
| खरगापुर | 74.5 मिमी (लगभग 3 इंच) |
इस वर्ष अब तक सबसे अधिक बारिश खरगापुर तहसील में हुई है, जहां कुल 308 मिमी (12 इंच) पानी बरसा है।
बान सुजारा बांध और जल स्रोतों का हाल
कम बारिश का सीधा असर जिले के जल स्रोतों पर पड़ा है। नदी और तालाबों में पानी की आवक बेहद कम है। बान सुजारा बांध की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां जलस्तर वर्तमान में केवल 30.259% तक ही पहुंच पाया है। धसान नदी से बांध में पानी की आवक फिलहाल शून्य है, जिसके चलते बांध के सभी गेट बंद रखे गए हैं और अब तक पानी छोड़ने की नौबत नहीं आई है।
किसानों के लिए संजीवनी बनी शुक्रवार की बारिश
- फसलों को राहत: लगभग एक सप्ताह के लंबे इंतजार के बाद हुई इस बारिश ने सूख रही खरीफ की फसलों को नई जिंदगी दी है।
- मौसम विभाग का पूर्वानुमान: मौसम विशेषज्ञों ने आगामी कुछ दिनों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है, जिससे जलस्तर में सुधार की उम्मीद है।
- कृषि क्षेत्र में उम्मीद: किसान अब अच्छी बारिश की कामना कर रहे हैं ताकि बुवाई और फसलों की सिंचाई का चक्र सुचारू रूप से चल सके।
कुल मिलाकर, टीकमगढ़ जिला अभी भी मानसून की भारी कमी से जूझ रहा है। हालांकि, शुक्रवार को हुई झमाझम बारिश ने किसानों के चेहरे पर थोड़ी मुस्कान जरूर बिखेरी है। अब सभी की निगाहें आसमान पर टिकी हैं कि मानसून कब अपनी पूरी सक्रियता के साथ जिले को जल संकट से उबारेगा।
