रेणुका शहाणे की नई वेब सीरीज ‘अगं आई अहो आई’ सास-बहू के रिश्तों की बदलती परिभाषा को बयां कर रही है
मशहूर अभिनेत्री रेणुका शहाणे अपनी नई मराठी वेब सीरीज ‘अगं आई अहो आई’ के जरिए सास-बहू के रिश्तों को एक नई और सकारात्मक दिशा देने का प्रयास कर रही हैं। एक विशेष बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि कैसे यह सीरीज पारंपरिक कलह से हटकर आपसी सम्मान और दोस्ती के रिश्ते को दर्शाती है। रेणुका के अनुसार, एक बहू का अपनी सास को मां के समान समझना और ससुराल पक्ष द्वारा उसे बेटी की तरह अपनाना ही सुखी परिवार की नींव है। यह सीरीज दिखाती है कि रिश्तों में कड़वाहट के बजाय समझदारी से कैसे बड़े से बड़े मतभेदों को दूर किया जा सकता है।
‘अगं आई’ और ‘अहो आई’ का गहरा अर्थ
सीरीज के नाम के पीछे के भाव को समझाते हुए रेणुका बताती हैं कि मराठी में ‘आई’ का अर्थ मां होता है। ‘अगं आई’ अपनी जन्म देने वाली मां को कहा जाता है, जबकि शादी के बाद ससुराल में सास को सम्मान देने के लिए ‘अहो आई’ संबोधित किया जाता है। कहानी का मुख्य सार यही है कि कैसे एक लड़की अपनी मां के दुलार से निकलकर ससुराल में उसी अपनापन को अपनी सास में ढूंढती है। यह सफर केवल एक घर बदलने का नहीं, बल्कि नए रिश्तों को दिल से स्वीकार करने का है।
सास-बहू का रिश्ता: दुश्मन नहीं, दोस्त बन सकते हैं
समाज में लंबे समय से चली आ रही इस धारणा को कि ‘औरत ही औरत की दुश्मन होती है’, रेणुका सिरे से खारिज करती हैं। वे मानती हैं कि सास-बहू का रिश्ता अगर दोस्ती की नींव पर टिका हो, तो घर में खुशहाली बनी रहती है। उनके अनुसार:
- सास को केवल अनुशासन बनाने वाली नहीं, बल्कि बहू की दोस्त और मार्गदर्शक होना चाहिए।
- बहू को अपनाने की जिम्मेदारी केवल उसकी नहीं, बल्कि पूरे ससुराल पक्ष की होती है।
- पूर्वाग्रहों के कारण रिश्तों में दरार आती है, जिसे सकारात्मक दृष्टिकोण से ठीक किया जा सकता है।
आज के दौर में टूटते परिवार और समाधान
परिवारों के बिखरने पर चिंता जताते हुए रेणुका कहती हैं कि आज की पीढ़ी को यह समझने की जरूरत है कि घर में होने वाले छोटे-मोटे मतभेदों को कलह में बदलना पूरे परिवार के लिए नुकसानदायक है। इसका सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ता है, जो घर के माहौल से ही संस्कार सीखते हैं। वे कहती हैं कि यदि माता-पिता आपस में सम्मान के साथ पेश आएंगे, तो बच्चे भी वही सीखेंगे।
एक मां और बेटी के रूप में रेणुका का अनुभव
सीरीज की शूटिंग के दौरान एक भावुक पल को याद करते हुए रेणुका ने बताया कि उन्होंने अपनी मां को बहुत याद किया। शादी के बाद मायके में आने वाले खालीपन और मां के भीतर के उस भाव को उन्होंने अपने किरदार में बखूबी पिरोया है। रेणुका का मानना है कि उनकी मां ने उन्हें हमेशा परिणाम की चिंता किए बिना ईमानदारी से मेहनत करने की सीख दी, जिसे वे आज खुद भी अपने बच्चों में संस्कारित कर रही हैं। अंत में, वे यही संदेश देती हैं कि रिश्तों में पारदर्शिता और एक-दूसरे के प्रति सम्मान ही परिवार को अटूट बनाता है।










