सुदेश बेरी का बड़ा बयान: पीएम मोदी को बताया ‘विष्णु का अवतार’, जंतर-मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारियों पर साधा निशाना
मशहूर अभिनेता सुदेश बेरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति अपनी गहरी निष्ठा जाहिर करते हुए उन्हें भगवान विष्णु का अवतार बताया है। एक हालिया इंटरव्यू में बेरी ने कहा कि यदि उन्हें मौका मिले, तो वह प्रधानमंत्री के चरण धोकर उनका जल पीना चाहेंगे। अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए चर्चित अभिनेता ने इस दौरान जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे संगठनों पर भी तीखा हमला बोला और देश की प्रगति में उन्हें बाधक बताया।
पीएम मोदी और ‘रामराज्य’ का समर्थन
प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए सुदेश बेरी ने कहा कि वे राजनीति से ऊपर उठकर उन्हें एक महामानव के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा, ‘जैसे हमने ईश्वर को नहीं देखा, फिर भी उनकी पूजा करते हैं, वैसे ही मैं मोदी जी का सम्मान करता हूं। वे पूरी दुनिया में भारत का मान बढ़ा रहे हैं।’
बेरी ने देश में ‘रामराज्य’ के आगमन का दावा करते हुए कहा कि यह बदलाव महसूस करने वाली चीज है जिसे हर कोई नहीं देख पा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ-साथ सरकार के प्रमुख चेहरों का भी समर्थन किया:
- अमित शाह (गृह मंत्री): बेरी ने उनकी कार्यप्रणाली को देशहित में बताया।
- योगी आदित्यनाथ (यूपी मुख्यमंत्री): राज्य में उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
- अजीत डोभाल (एनएसए): राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का समर्थन किया।
जंतर-मंतर पर विरोध करने वालों पर तंज
अभिनेता ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे समूहों, जिन्हें उन्होंने ‘सीजीपी’ (CJP) पार्टी के संदर्भ में संबोधित किया, पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि ये लोग देश को आगे ले जाने के बजाय पीछे खींच रहे हैं। बेरी ने सलाह दी कि यदि इन लोगों को समाज सेवा का इतना ही शौक है, तो उन्हें विरोध प्रदर्शन के बजाय धरातल पर काम करना चाहिए:
सुदेश बेरी के प्रमुख सुझाव:
- बच्चों के लिए पार्कों और खेल के मैदानों का निर्माण करें।
- बुजुर्गों के लिए ओल्ड एज होम्स (वृद्धाश्रम) खोलें।
- जरूरतमंदों के इलाज की व्यवस्था करें।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि केवल जंतर-मंतर पर बैठकर शोर मचाने से देश का भला नहीं होगा। पार्टी के नाम और उनके अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ये लोग केवल राजनीति के लिए विरोध कर रहे हैं और उनके पास देश के विकास का कोई ठोस एजेंडा नहीं है।









