अंकित शर्मा हत्याकांड: दिल्ली दंगों के मामले में AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन दोषी करार
साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए भीषण दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की नृशंस हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित कुल 5 आरोपियों को हत्या और दंगे का दोषी माना है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने सोमवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाया। हालांकि, पर्याप्त सबूत न मिल पाने के कारण अदालत ने 6 अन्य आरोपियों को इस मामले से बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद कानूनी गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि यह मामला दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित और संवेदनशील मुकदमों में से एक था।
किन धाराओं में दोषी पाए गए आरोपी?
अदालत ने सुनवाई के दौरान पेश किए गए 110 गवाहों में से 91 गवाहों के बयानों और ठोस साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया। ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को निम्नलिखित गंभीर धाराओं के तहत दोषी पाया गया है:
| धारा (IPC) | अपराध का विवरण |
|---|---|
| धारा 302 | हत्या |
| धारा 147/148 | दंगा करना और घातक हथियारों से लैस होना |
| धारा 149 | गैरकानूनी जमावड़ा |
| धारा 365 | अपहरण |
| धारा 188 | सरकारी आदेश की अवहेलना |
विशेष बात यह है कि अदालत ने ताहिर हुसैन को ‘आपराधिक साजिश’ के आरोपों से बरी कर दिया है, लेकिन हत्या और दंगे के मुख्य आरोपों में उन्हें दोषी ठहराया गया है। फैसला सुनाए जाने के दौरान ताहिर हुसैन अदालत में भावुक होते और रोते हुए देखे गए।
क्या था पूरा मामला?
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके में हिंसा भड़क गई थी। इसी दौरान 25 फरवरी को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उनका शव अगले दिन एक नाले से बरामद हुआ था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
इस मामले में अंकित शर्मा के पिता की शिकायत पर दयालपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गहन जांच के बाद 648 पन्नों की चार्जशीट अदालत में पेश की थी। पुलिस ने अपनी जांच में ताहिर हुसैन की संलिप्तता के ठोस सबूत जुटाने का दावा किया था।
पुलिस कमिश्नर ने जांच को बताया निष्पक्ष
दिल्ली दंगों के दौरान जांच का नेतृत्व करने वाले तत्कालीन स्पेशल कमिश्नर और वर्तमान पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा ने इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता हमेशा से ही कानून-व्यवस्था बनाए रखना और बिना किसी भेदभाव के साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच करना रही है। उन्होंने कहा कि अदालत का यह फैसला जांच टीम की मेहनत और पेशेवर कार्यकुशलता की जीत है।
- न्यायिक प्रक्रिया: 17 मार्च 2023 को मामले में आरोप तय किए गए थे।
- जांच का दायरा: मुख्य चार्जशीट के साथ 6 पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट भी दाखिल की गई थीं।
- अगला कदम: अदालत अब दोषी करार दिए गए आरोपियों को सजा की अवधि पर सुनवाई करेगी।









