Delhi News: लाल चंदन से बना खास परफ्यूम, दिल्ली में चर्चा का विषय


फिल्म 'पुष्पा' के बाद चर्चा में आए लाल चंदन (रेड सैंडलवुड) ने अब सुगंध की दुनिया में भी अपनी धाक जमा ली है। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित 'कारीगरी बाजार' में कन्नौज का तैयार किया गया लाल चंदन का इत्र लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अपनी दुर्लभता और पारंपरिक निर्माण…

फिल्म ‘पुष्पा’ के बाद चर्चा में आए लाल चंदन (रेड सैंडलवुड) ने अब सुगंध की दुनिया में भी अपनी धाक जमा ली है। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित ‘कारीगरी बाजार’ में कन्नौज का तैयार किया गया लाल चंदन का इत्र लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अपनी दुर्लभता और पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया के कारण इस इत्र की कीमत 2.5 लाख रुपये प्रति लीटर बताई जा रही है, जो इसे बाजार में सबसे महंगे और खास उत्पादों में से एक बनाती है।

24 घंटे तक रहती है सुगंध

कारीगरी बाजार में स्टॉल लगाने वाले इत्र विशेषज्ञ रोहित के अनुसार, यह इत्र पूरी तरह से प्राकृतिक चंदन से तैयार किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘लॉन्ग लास्टिंग’ खुशबू है, जो शरीर पर लगाने के बाद करीब 24 घंटे तक बरकरार रहती है। शुद्धता और पारंपरिक विधि के कारण जो लोग दुर्लभ सुगंध के शौकीन हैं, वे विशेष रूप से इस इत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

निर्माण में लगता है 25 दिन का समय

कन्नौज के पारंपरिक इत्र निर्माण की प्रक्रिया बेहद जटिल और समय लेने वाली है। लाल चंदन से इत्र निकालने की इस धीमी और पारंपरिक पद्धति में एक लीटर इत्र तैयार करने में करीब 24 से 25 दिन का समय लगता है। रोहित ने बताया कि निर्माण की यह लंबी प्रक्रिया ही इत्र की गुणवत्ता और उसकी सुगंध को अद्वितीय बनाती है।

क्यों इतनी अधिक है कीमत?

इत्र की भारी कीमत के पीछे मुख्य कारण कच्चे माल की उपलब्धता और बढ़ती लागत है। विशेषज्ञों का कहना है कि असली और प्राकृतिक चंदन का मिलना अब बेहद कठिन हो गया है।

  • चंदन की बढ़ती लागत: जो चंदन पहले 1 लाख रुपये की रेंज में उपलब्ध था, उसकी कीमत अब दोगुनी हो चुकी है।
  • प्राकृतिक सामग्री: कृत्रिम सुगंधों के विपरीत, इसमें पूर्णतः प्राकृतिक तत्वों का उपयोग होता है।
  • पारंपरिक श्रम: निर्माण प्रक्रिया में लगने वाला समय और मेहनत इत्र की अंतिम कीमत को निर्धारित करते हैं।

मिट्टी की खुशबू भी बनी पसंद

लाल चंदन के अलावा, कारीगरी बाजार में ‘मिट्टी’ के इत्र ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। कन्नौज की विशेष मिट्टी से तैयार यह इत्र बारिश के बाद आने वाली सोंधी खुशबू का एहसास कराता है। हालांकि लाल चंदन की तुलना में इसकी कीमत काफी कम है, लेकिन अपनी अनोखी खुशबू के कारण यह प्रदर्शनी में खरीदारों की पहली पसंद बना हुआ है।

ऑनलाइन भी उपलब्ध है कन्नौज का इत्र

कन्नौज में अपनी यूनिट चलाने वाले कारीगर अब देश भर की प्रदर्शनियों के माध्यम से अपनी पहचान बना रहे हैं। यदि कोई ग्राहक प्रदर्शनी में नहीं पहुंच पाता है, तो वे इनकी आधिकारिक वेबसाइट या संपर्क नंबर के जरिए ऑनलाइन ऑर्डर भी कर सकते हैं। कन्नौज की इस पारंपरिक कला की मांग अब न केवल भारत के अन्य राज्यों में, बल्कि डिजिटल माध्यमों से भी तेजी से बढ़ रही है।