दिल्ली विधानसभा का मॉनसून सत्र: ‘प्रश्नकाल’ बहाल करने की मांग पर आम आदमी पार्टी और सरकार आमने-सामने
दिल्ली विधानसभा के आगामी मॉनसून सत्र को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखी है। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता से आग्रह किया है कि सदन की कार्यवाही में ‘प्रश्नकाल’ (Question Hour) को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। AAP का तर्क है कि प्रश्नकाल के बिना विधायकों के लिए जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को सरकार के समक्ष उठाना और जवाबदेही तय करना कठिन हो जाता है।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है प्रश्नकाल
बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बुराड़ी से AAP विधायक संजीव झा ने कहा कि यह लगातार दूसरा सत्र है जब प्रश्नकाल को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने इसे संसदीय परंपरा के खिलाफ बताते हुए कहा कि विधायी कार्यवाही का मुख्य उद्देश्य ही चर्चा और जवाबदेही है।
- जवाबदेही का संकट: विधायक अपने क्षेत्र की समस्याओं को सीधे सरकार के सामने रखने के लिए प्रश्नकाल का उपयोग करते हैं।
- पार्टी का रुख: कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रश्नकाल का आयोजन अनिवार्य होना चाहिए।
7 से 11 अगस्त तक चलेगा सत्र
दिल्ली विधानसभा का मॉनसून सत्र 7 अगस्त से 11 अगस्त तक निर्धारित किया गया है। हालांकि, सत्र की कुल अवधि तीन कार्यदिवसों की ही होगी। इस सत्र के आयोजन का निर्णय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया था।
सरकार का कहना है कि इस सत्र के दौरान दिल्ली के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं और नीतिगत फैसलों पर गंभीर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि सरकार जनहित को प्राथमिकता देते हुए उन मुद्दों पर सार्थक संवाद के लिए प्रतिबद्ध है जो सीधे दिल्ली की जनता को प्रभावित करते हैं।
फिलहाल, प्रश्नकाल को लेकर AAP की यह मांग राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। देखना यह होगा कि विधानसभा अध्यक्ष और सरकार इस पर क्या अंतिम निर्णय लेती है और क्या सत्र के दौरान विधायकों को जनता के सवाल पूछने का मौका मिल पाएगा।










