बेमेतरा: परपोड़ा आदर्श आंगनबाड़ी में गहराया जल संकट, नन्हे बच्चों की सेहत पर मंडराया खतरा
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत परपोड़ा का आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र इन दिनों गंभीर पेयजल समस्या से जूझ रहा है। शिक्षा और पोषण के केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले इस संस्थान में बच्चों के लिए पीने का शुद्ध पानी तक उपलब्ध नहीं है। पानी की किल्लत के चलते न केवल बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि उनकी सेहत पर भी विपरीत असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
निजी कनेक्शन ने छीनी बच्चों की सुविधा
ग्रामीणों का आरोप है कि आंगनबाड़ी केंद्र तक पानी पहुंचाने वाली पाइपलाइन गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा निजी कनेक्शन लेने के दौरान क्षतिग्रस्त हो गई थी। पहले जहां सार्वजनिक बोरवेल से केंद्र में नियमित पानी की आपूर्ति होती थी, वहीं अब यह सुविधा पूरी तरह ठप पड़ गई है। पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने से आंगनबाड़ी केंद्र अब पूरी तरह से पानी के लिए मोहताज हो गया है।
समस्या के मुख्य बिंदु:
- पाइपलाइन की क्षति: निजी कनेक्शन लेने के चक्कर में मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई।
- मरम्मत का प्रयास विफल: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने अपने निजी खर्च पर कई बार मरम्मत कराई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
- भोजन में दिक्कत: पानी न होने के कारण बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार करने में भी भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
दैनिक कामकाज पर पड़ रहा असर
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शकुंतला शर्मा ने बताया कि पानी की कमी के कारण उन्हें और रसोइया शकुंती यादव को रोजाना आसपास के घरों या दूर स्थित हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ता है। खाना पकाने से लेकर बच्चों के हाथ धोने और पीने के पानी तक के लिए बाहर जाना पड़ता है, जिससे केंद्र का दैनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
जिम्मेदारों की चुप्पी और ग्रामीणों का आक्रोश
इस गंभीर मामले पर जब ग्राम पंचायत परपोड़ा के सरपंच फत्तेलाल साहू से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। प्रशासन की उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से स्थानीय ग्रामीण बेहद आक्रोशित हैं।
| प्रभावित पक्ष | समस्या का विवरण |
|---|---|
| आंगनबाड़ी केंद्र | पेयजल आपूर्ति पूरी तरह बंद |
| बच्चे | स्वास्थ्य और पढ़ाई पर बुरा असर |
| स्टाफ | बाहर से पानी ढोने को मजबूर |
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सार्वजनिक बोरवेल के कथित दुरुपयोग को रोककर आंगनबाड़ी केंद्र में तत्काल प्रभाव से स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बच्चों को होने वाली असुविधा और बढ़ जाएगी।
