CMO के भरोसे तीन नगर निकाय, पेंड्रा-गौरेला-मरवाही में विकास कार्य ठप


गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिले के तीनों प्रमुख नगरीय निकायों—नगर पालिका परिषद पेंड्रा, नगर पालिका परिषद गौरेला और नगर पंचायत मरवाही—में एक ही मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के भरोसे कामकाज चल रहा है। इस व्यवस्था पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने गंभीर सवाल खड़े करते…

जीपीएम जिले के तीन नगरीय निकायों में एक ही सीएमओ, जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिले के तीनों प्रमुख नगरीय निकायों—नगर पालिका परिषद पेंड्रा, नगर पालिका परिषद गौरेला और नगर पंचायत मरवाही—में एक ही मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के भरोसे कामकाज चल रहा है। इस व्यवस्था पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे विकास कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बताया है। जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि एक अधिकारी पर तीन निकायों का भार होने से प्रशासनिक कार्य सुस्त पड़ गए हैं और जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

पेंड्रा में थमी विकास की रफ्तार

नगर पालिका परिषद पेंड्रा के अध्यक्ष राकेश जालान ने स्पष्ट किया कि सीएमओ की व्यस्तता के कारण पेंड्रा के विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिला स्तरीय बैठकों, अन्य निकायों के दौरों और वर्चुअल मीटिंग्स के कारण अधिकारी पेंड्रा में नाममात्र के लिए ही उपलब्ध हो पाते हैं। स्थिति यह है कि महत्वपूर्ण फाइलें हफ्तों तक दफ्तरों में अटकी रहती हैं, जिससे न केवल निर्माण कार्य रुक गए हैं, बल्कि आम नागरिकों के जरूरी काम भी समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं।

मरवाही और गौरेला का भी बुरा हाल

अन्य दो निकायों की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है, जहां प्रशासनिक उदासीनता का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है:

  • मरवाही का हाल: नगर पंचायत मरवाही की अध्यक्ष मधुबाबा गुप्ता ने बताया कि पेंड्रा से 40 किलोमीटर की दूरी होने की वजह से सीएमओ सप्ताह में सिर्फ एक दिन ही यहां पहुंच पाते हैं। इससे वित्तीय स्वीकृति और निविदा (टेंडर) जैसी प्रक्रियाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं।
  • गौरेला की समस्या: नगर पालिका परिषद गौरेला के अध्यक्ष मुकेश दुबे का कहना है कि अधिकारी की सीमित उपलब्धता के कारण नागरिक सुविधाओं से जुड़े मामलों का निपटारा नहीं हो पा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।

शासन से नियमित और पूर्णकालिक नियुक्ति की मांग

तीनों नगरीय निकायों के अध्यक्षों ने संयुक्त रूप से राज्य शासन और नगरीय प्रशासन विभाग से मांग की है कि इस व्यवस्था को तुरंत बदला जाए। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि प्रत्येक निकाय की अपनी अलग प्राथमिकताएं और समस्याएं होती हैं, जिन्हें एक ही अधिकारी के जरिए हल करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। उन्होंने मांग की है कि पेंड्रा, गौरेला और मरवाही में अलग-अलग नियमित एवं पूर्णकालिक सीएमओ की तत्काल नियुक्ति की जाए।

जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यदि हर निकाय को अपना स्वतंत्र अधिकारी मिलता है, तो प्रशासनिक कार्यों में न केवल गति आएगी, बल्कि विकास योजनाओं का क्रियान्वयन भी समयबद्ध तरीके से हो सकेगा। अब देखना यह होगा कि शासन जनहित को ध्यान में रखते हुए इस गंभीर मुद्दे पर क्या सकारात्मक निर्णय लेता है।