रायपुर में आज निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, मंदिरों में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा के पावन अवसर पर आज राजधानी रायपुर में भक्ति का सैलाब उमड़ने वाला है। शहर के प्रमुख जगन्नाथ मंदिरों से भव्य शोभायात्राएं निकाली जाएंगी, जिसके लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नगर के विभिन्न क्षेत्रों में रथयात्रा के लिए अलग-अलग समय और रूट निर्धारित किए गए हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है, जिसे देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
मुख्य आयोजन से पहले मंदिरों को आकर्षक फूलों और रोशनी से सजाया गया है। रथयात्रा जिन-जिन मार्गों से होकर गुजरेगी, वहां विशेष साफ-सफाई सुनिश्चित की गई है। प्रशासन और यातायात विभाग ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे भीड़ और संभावित ट्रैफिक दबाव को देखते हुए ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं और नियमों का पालन करें।
झलकियां: रथयात्रा की अनूठी परंपराएं
- भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से पूर्व एक विशेष परंपरा का निर्वहन किया जाता है।
- ओडिशा के कुशल कारीगरों ने महाप्रभु के तीनों रथों को बेहद आकर्षक ढंग से तैयार किया है।
- महाप्रभु के रथ के मार्ग की सफाई सामान्य झाड़ू से नहीं, बल्कि करीब सवा किलो वजनी दो सोने की झाड़ुओं से की जाती है।
रथयात्रा का रूट चार्ट और समय सारणी
| मंदिर का नाम | समय | प्रमुख मार्ग |
|---|---|---|
| गायत्री नगर मंदिर | दोपहर 1:00 बजे | खम्हारडीह थाना तक और वापसी |
| टूरी-हटरी मंदिर | निर्धारित समय | लोहार चौक, पुरानी बस्ती थाना, कंकालीपारा, तात्यापारा, आमापारा, लखेनगर व टिल्लू चौक |
| सदर बाजार मंदिर | शाम 4:00 बजे | कोतवाली चौक, मालवीय रोड, जवाहर चौक, फूल चौक से पुजारी निवास |
| गुड़ियारी पड़ाव मंदिर | दोपहर 12:30 बजे | स्टेशन रोड, तेलघानी नाका, अग्रसेन चौक, आमापारा, तात्यापारा, बंजारीपारा, राठौर चौक |
ओडिशा की तर्ज पर सजावट और धार्मिक अनुष्ठान
रथयात्रा की भव्यता को बढ़ाने के लिए ओडिशा से आए कलाकारों ने गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर को पारंपरिक पेंटिंग्स और अलंकरणों से सजाया है। मंदिर की दीवारों और रथों को पुरी की तर्ज पर जीवंत स्वरूप दिया गया है। इसके अलावा, धार्मिक अनुष्ठानों को पूरी पवित्रता के साथ संपन्न कराने के लिए ओडिशा से विशेष पुजारियों को आमंत्रित किया गया है, ताकि रायपुर के भक्तों को पुरी जैसी आध्यात्मिक अनुभूति मिल सके।
500 साल पुराना ऐतिहासिक टुरी-हटरी मंदिर
रायपुर की पुरानी बस्ती में स्थित टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर शहर के सबसे प्राचीन धरोहरों में से एक है। लगभग 500 साल पुराने इस मंदिर को पूर्व में ‘साहूकार मंदिर’ के नाम से जाना जाता था। अग्रवाल परिवार द्वारा निर्मित इस मंदिर का सौंदर्यीकरण अंग्रेजों के शासनकाल में हुआ था। वर्तमान में यह मंदिर न केवल भगवान जगन्नाथ, बल्कि श्रीराम दरबार, शिव मंदिर, संतोषी माता और संकटमोचन हनुमान मंदिर के कारण आस्था का बड़ा केंद्र है।
सोने की झाड़ू से मार्ग की सफाई: एक गौरवशाली परंपरा
रायपुर में रथयात्रा के दौरान ‘छेरापहरा’ की परंपरा का विशेष महत्व है। महाप्रभु के रथ के मार्ग को पवित्र करने के लिए करीब सवा किलो वजन की दो सोने की झाड़ुओं का उपयोग किया जाता है। ये झाड़ू साल भर सुरक्षित तिजोरी में रखी जाती हैं और केवल रथयात्रा के दिन ही बाहर निकाली जाती हैं। इस ऐतिहासिक परंपरा में राज्यपाल और मुख्यमंत्री जैसे गणमान्य व्यक्ति भी अपनी सहभागिता निभाते हैं।
