Jagannath Yatra: बिलासपुर में निकली भव्य रथयात्रा, उमड़ा आस्था का सैलाब

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित रेलवे क्षेत्र में आज भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा 20 फीट ऊंचे दिव्य रथ पर विराजमान होकर अपनी नौ दिवसीय यात्रा पर निकले। शहरवासियों के लिए यह दिन किसी बड़े…

बिलासपुर में निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, जयकारों से गूंजा रेलवे क्षेत्र

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित रेलवे क्षेत्र में आज भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा 20 फीट ऊंचे दिव्य रथ पर विराजमान होकर अपनी नौ दिवसीय यात्रा पर निकले। शहरवासियों के लिए यह दिन किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होता, जिसका इंतजार वे पूरे साल करते हैं।

ओडिशा के पुरी की तर्ज पर आयोजित इस रथयात्रा में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ की रस्सी को छूना और उसे खींचना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यही कारण है कि रथ को खींचने के लिए भक्तों में एक अलग ही होड़ और उत्साह देखने को मिला।

‘छेरा पहरा’ रस्म के साथ हुआ रथयात्रा का शुभारंभ

दोपहर लगभग 3 बजे पारंपरिक ‘छेरा पहरा’ रस्म के साथ रथयात्रा की शुरुआत हुई। इस वर्ष एसईसीएल के निदेशक रमेशचंद्र महापात्र ने राजा के स्वरूप में इस प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया। उन्होंने भगवान के रथ के सामने सोने की झाड़ू से मार्ग साफ किया और पूजा-अर्चना कर स्वयं को प्रभु का विनम्र सेवक होने का संदेश दिया।

रथयात्रा और कार्यक्रम की मुख्य रूपरेखा

विवरणजानकारी
रथ की ऊंचाई20 फीट
मुख्य रस्मछेरा पहरा
गुंडिचा मंदिर में प्रवास7 दिन
वापसी की तिथि24 जुलाई

गुंडिचा मंदिर में सात दिनों का विश्राम

भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ मौसी मां के मंदिर, जिसे गुंडिचा मंदिर के नाम से जाना जाता है, पहुंच गए हैं। यहाँ भगवान सात दिनों तक विश्राम करेंगे। इस दौरान मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया है। अंत में, 24 जुलाई को प्रभु श्री जगन्नाथ पुनः अपने मुख्य मंदिर लौटेंगे।

  • भक्तिमय माहौल: रथयात्रा के दौरान ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष से पूरा रेलवे क्षेत्र भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
  • सजावट: मंदिर परिसर को अत्यंत आकर्षक रूप से सजाया गया था, जो श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।
  • जनसहयोग: भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बिलासपुर में भगवान जगन्नाथ के प्रति भक्तों की अटूट आस्था और समर्पण कितना गहरा है। पूरा शहर दिन भर भक्ति के भजनों और शंख ध्वनि से गूंजता रहा।