गरियाबंद: 24 करोड़ की सड़क निर्माण में घटिया मिट्टी का इस्तेमाल, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के राजिम में 24 करोड़ रुपए की लागत से बन रही सड़क परियोजना इन दिनों विवादों के घेरे में है। स्थानीय लोगों और जानकारों का आरोप है कि सड़क के अर्थ वर्क (भराई) के दौरान मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों के अनुसार, सड़क निर्माण में ‘सेलेक्टेड स्वाइल’ यानी चयनित मिट्टी का उपयोग अनिवार्य है, लेकिन इसके विपरीत ठेकेदार द्वारा शीतला तालाब से निकाली गई मिट्टी का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।
तालाब की मिट्टी से सड़क निर्माण: नियमों का उल्लंघन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शीतला तालाब के सौंदर्यीकरण के दौरान निकाली गई मिट्टी को सड़क निर्माण करने वाली कंपनी को सौंप दिया गया। गौरतलब है कि तालाब सौंदर्यीकरण के लिए 1 करोड़ रुपए और सड़क निर्माण के लिए 24 करोड़ रुपए का अलग-अलग बजट आवंटित है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक विभाग की परियोजना से निकली मिट्टी का उपयोग दूसरे निर्माण कार्य में करना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह सड़क की दीर्घकालिक मजबूती को भी खतरे में डालता है।
सीएमओ और लोक निर्माण विभाग का पक्ष
इस पूरे मामले पर राजिम नगर पालिका के सीएमओ संतोष विश्वकर्मा ने अपना बचाव करते हुए कहा कि यह निर्णय जनप्रतिनिधियों की सहमति से लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए कोई विशेष सरकारी बजट नहीं था, इसलिए तालाब की गहराई बढ़ाने के लिए निकाली गई मिट्टी को सड़क निर्माण कंपनी को दे दिया गया। बदले में कंपनी तालाब पर पचरी (घाट) का निर्माण करेगी। वहीं, लोक निर्माण विभाग (PWD) के एसडीओ मनीष साहू ने दावों को खारिज करते हुए कहा कि मिट्टी की जांच रिपोर्ट सकारात्मक आई है और सभी मानक पूरे किए गए हैं।
सड़क निर्माण में ‘सेलेक्टेड स्वाइल’ की अनिवार्यता
विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क निर्माण में मिट्टी का चयन उसकी मजबूती तय करता है। नीचे दी गई तालिका से समझें कि क्यों तालाब की मिट्टी का उपयोग खतरनाक हो सकता है:
| मानक (सेलेक्टेड स्वाइल) | तालाब की मिट्टी |
|---|---|
| लाल मुरम, पीली मिट्टी और कंकड़ का मिश्रण | दलदली और नमी युक्त मिट्टी |
| बेहतर जल निकासी और मजबूती | बारिश में कटाव और गड्ढों का डर |
| सड़क की नींव के लिए उपयुक्त | निर्माण की गुणवत्ता के लिए जोखिम भरी |
लागत बचाने का खेल?
राजिम के पुराने और नए मेला स्थल को जोड़ने वाली यह 3 किलोमीटर लंबी सड़क रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। आरोप है कि ठेकेदार ने परिवहन लागत बचाने के लिए सड़क के बिल्कुल पास स्थित शीतला तालाब की मिट्टी का उपयोग किया है। बारिश के बाद सड़क के कई हिस्सों में अभी से कटाव और गड्ढे नजर आने लगे हैं, जो संबंधित विभागों के दावों की पोल खोल रहे हैं। क्या करोड़ों की यह सड़क पहली बारिश भी झेल पाएगी? यह बड़ा सवाल अब भी बरकरार है।









