कोरबा में मिनीमाता बांगो बांध का जलस्तर बढ़ा, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मूसलाधार बारिश के चलते मिनीमाता बांगो बांध का जलस्तर तेजी से ऊपर आ रहा है, जिसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। वर्तमान में बांध का जलभराव 354.61 मीटर यानी अपनी क्षमता का 71.67% तक पहुंच गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि जलस्तर 359.66 मीटर के खतरे के निशान को छूता है, तो बांध के गेट खोलकर हसदेव नदी में पानी छोड़ा जाएगा, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
नदी किनारे रहने वालों के लिए सुरक्षा निर्देश
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता एस.के. भारती ने स्पष्ट किया है कि हसदेव नदी के बहाव क्षेत्र में आने वाले सभी गांवों, औद्योगिक इकाइयों, खदानों और ठेकेदारों को अपनी संपत्ति सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने साफ तौर पर कहा है कि किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति या बाढ़ से होने वाले नुकसान के लिए विभाग जिम्मेदार नहीं होगा। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के जलस्तर पर पैनी नजर रखें और प्रशासन द्वारा दी गई चेतावनियों को गंभीरता से लें।
बाढ़ प्रभावित संभावित क्षेत्र और मुनादी
प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए प्रभावित गांवों में मुनादी (घोषणा) कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। इन क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है:
- प्रमुख प्रभावित गांव: बांगो, चर्रा, पोड़ी उपरोड़ा, कोनकोना, लेपरा, टुनियाकछार, पाथा, गाड़ाघाट, छिनमेर, कछार, कलमीपारा और जूनापारा।
- अन्य संवेदनशील क्षेत्र: तिलाईडांड, डुगुपारा, टुंगुमांड़ा, छिर्रापारा, मछलीबाटा, कोरियाघाट, धनगांव, डोंगाघाट, नरमदा, औराकछार, सोनगुड़ा, जेलगांव, झाबू, नवागांव, तिलसाभाटा, लोतलोता, स्याहीमुड़ी, कोडा, हथमार, झोरा और सिरकीकला।
जिले में बारिश के आंकड़े और निगरानी
विभाग के अनुसार, फिलहाल जलाशय से विद्युत संयंत्रों को पानी की आपूर्ति सामान्य है, लेकिन स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। 1 जून से 21 जुलाई के बीच कोरबा जिले में औसत वर्षा 409.7 मिमी दर्ज की गई है। बारिश का विवरण इस प्रकार है:
- सर्वाधिक वर्षा: दर्री (539.5 मिमी)
- न्यूनतम वर्षा: करतला (267.1 मिमी)
- अन्य क्षेत्र: दीपका (452 मिमी), पाली (480.2 मिमी), पसान (467.3 मिमी), और कटघोरा व पोड़ी उपरोड़ा (439 मिमी)।
प्रशासन ने आम नागरिकों से आग्रह किया है कि वे नदी-नालों के पास जाने से बचें और जलभराव की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर शरण लें। गेट खोलने का निर्णय जलस्तर की स्थिति की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।









