सूरजपुर में मानसून की बेरुखी: 50 फीसदी कम बारिश से धान की खेती पर मंडराया संकट
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में इस बार मानसून की सुस्त चाल ने किसानों की नींद उड़ा दी है। सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम बारिश दर्ज किए जाने के कारण जिले में कृषि कार्य पूरी तरह से ठप पड़ गए हैं। अधिकांश खेत अभी भी सूखे पड़े हैं, जिससे धान की रोपाई का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ग्रामीण इलाकों में किसानों का दर्द साफ झलक रहा है, जो बताते हैं कि पिछले साल इस समय तक खेतों में हरियाली छा चुकी थी, लेकिन इस बार स्थिति बेहद चिंताजनक है। कई क्षेत्रों में धान का थरहा (नर्सरी) तक तैयार नहीं हो पाया है, जिससे रोपाई शुरू करना फिलहाल नामुमकिन सा लग रहा है।
आर्थिक तंगी की मार और किसानों की चिंता
बारिश में देरी का सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। किसानों का मानना है कि उनकी आय का एकमात्र जरिया खेती ही है, जिससे परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण खर्च पूरे होते हैं। किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से मिलने वाली राहत राशि या बीमा क्लेम, अच्छी फसल का विकल्प नहीं हो सकते। यदि खेतों में बंपर उत्पादन नहीं हुआ, तो साल भर उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।
जलस्त्रोतों का घटता स्तर और सिंचाई की समस्या
कम बारिश का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के जलस्त्रोतों पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। जलस्तर में भारी गिरावट के कारण छोटे-बड़े तालाब और बांध सूखने की कगार पर हैं। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा उन किसानों को भुगतना पड़ रहा है, जो सिंचाई के लिए पूरी तरह से मानसून पर निर्भर हैं।
कृषि विभाग की सलाह और वैकल्पिक खेती पर जोर
उप संचालक कृषि, संपदा पैकरा ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए किसानों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- अल्प अवधि वाली धान की किस्में: कम बारिश को देखते हुए कम समय में तैयार होने वाली धान की किस्मों का चयन करें।
- फसल बीमा: मौसम की अस्थिरता को देखते हुए किसान अपनी फसलों का बीमा जरूर करवाएं।
- वैकल्पिक फसलें: जरूरत पड़ने पर किसान दलहन और तिलहन जैसी फसलों की ओर रुख करें ताकि नुकसान को कम किया जा सके।
सूरजपुर में वर्षा की स्थिति (तुलनात्मक विवरण)
| विवरण | स्थिति |
|---|---|
| औसत बारिश | 50% कम |
| मुख्य फसल | धान (रोपाई अधूरी) |
| प्रमुख चिंता | सिंचाई और आर्थिक संकट |
फिलहाल, जिले के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। कृषि विभाग लगातार तकनीकी सलाह के जरिए किसानों का मनोबल बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। सभी की निगाहें अब मानसून के दोबारा सक्रिय होने पर टिकी हैं, ताकि धान की रोपाई को दोबारा रफ्तार मिल सके और किसानों का वर्ष भर का संकट दूर हो सके।









