NEET: हनुमानगढ़ के दैविक ने पहले प्रयास में पाई 47वीं रैंक, हासिल किए 695 अंक

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के रहने वाले दैविक मिड्ढा ने नीट-यूजी परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर में 47वीं रैंक हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है। अपनी पहली ही कोशिश में इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करने वाले दैविक ने कुल 720 में से 695 अंक प्राप्त किए हैं। उनकी इस उपलब्धि ने न…

हनुमानगढ़ के लाल ने नीट-यूजी में लहराया परचम, हासिल की 47वीं ऑल इंडिया रैंक

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के रहने वाले दैविक मिड्ढा ने नीट-यूजी परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर में 47वीं रैंक हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है। अपनी पहली ही कोशिश में इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करने वाले दैविक ने कुल 720 में से 695 अंक प्राप्त किए हैं। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे हनुमानगढ़ को गौरवान्वित किया है। राज्य स्तर पर भी दैविक ने सातवीं रैंक अपने नाम की है।

मेधावी छात्र का सफर: जेईई में भी किया कमाल

दैविक की प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने बिना गणित विषय के भी जेईई मेन्स की परीक्षा में 99.78 पर्सेंटाइल हासिल किए थे। हालांकि, उनका एकमात्र सपना डॉक्टर बनना था, जिसके लिए उन्होंने नीट को अपना मुख्य लक्ष्य बनाया। उनके पिता डॉ. पवन मिड्ढा एक डेंटिस्ट हैं, जिनके मार्गदर्शन और पारिवारिक परिवेश ने दैविक को बचपन से ही मेडिकल क्षेत्र में जाने के लिए प्रेरित किया।

सफलता की मुख्य बातें

  • ऑल इंडिया रैंक: 47वीं
  • कुल अंक: 695/720
  • राज्य स्तर पर रैंक: 7वीं
  • 12वीं कक्षा का परिणाम: 93.6 प्रतिशत

कड़ी मेहनत और परिवार का सहयोग

दैविक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और संस्थान के मार्गदर्शन को दिया है। दसवीं कक्षा के बाद सीकर जाकर नीट की तैयारी शुरू करने वाले दैविक के साथ उनकी माता वाणी मिड्ढा भी रहीं, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल मिल सके। दैविक का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कामयाबी पाने के लिए नियमित अध्ययन और आत्म-अनुशासन सबसे अनिवार्य तत्व हैं।

तैयारी की रणनीति: मॉक टेस्ट का महत्व

अपनी तैयारी के दौरान दैविक ने कोचिंग के छह घंटों के अलावा प्रतिदिन 6 से 7 घंटे का समय सेल्फ-स्टडी को दिया। उन्होंने केवल सिलेबस पूरा करने के बजाय विषयों की वैचारिक समझ विकसित करने पर जोर दिया। दैविक के अनुसार, उनकी सफलता में टेस्ट सीरीज का बड़ा योगदान रहा है:

रणनीतिलाभ
नियमित मॉक टेस्टसमय प्रबंधन में सुधार
टाइम मैनेजमेंटपरीक्षा का दबाव (Time Anxiety) कम हुआ
गहन अध्ययनविषयों की स्पष्ट समझ

दैविक की यह उपलब्धि हनुमानगढ़ के उन हजारों विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि सही रणनीति के साथ निरंतर अभ्यास किया जाए, तो किसी भी लक्ष्य को पाना असंभव नहीं है। परिणाम घोषित होते ही उनके घर पर जश्न का माहौल था और बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।