रूस में टेलीग्राम के फाउंडर पावेल दुरोव की मुश्किलें बढ़ीं, आतंकवाद के आरोपों में इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में शामिल
रूस की प्रमुख सुरक्षा एजेंसी ‘फेडरल सिक्योरिटी सर्विस’ (FSS) ने टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने का मामला दर्ज किया है। रूसी अधिकारियों ने दुरोव को अंतरराष्ट्रीय भगोड़ा घोषित करते हुए उन्हें ‘इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट’ में डाल दिया है। यह कार्रवाई टेलीग्राम द्वारा उन चैनल्स और बॉट्स को हटाने में विफल रहने के बाद की गई है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर यूक्रेनी खुफिया एजेंसियां और चरमपंथी संगठन रूस में तोड़फोड़ और साइबर हमलों के लिए कर रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के गंभीर आरोप
FSS का दावा है कि टेलीग्राम प्रशासन को बार-बार चेतावनी देने के बावजूद उन्होंने संदिग्ध गतिविधियों में शामिल चैट्स और चैनल्स पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। रूसी सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इन मंचों का उपयोग रूस के भीतर साइबर फ्रॉड और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा है। इस नए कानूनी विवाद के बाद अब रूस में टेलीग्राम की सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगने की अटकलें तेज हो गई हैं।
पावेल दुरोव का सफर और विवाद
रूस में जन्मे पावेल दुरोव, जिन्हें अक्सर ‘रूस का मार्क जुकरबर्ग’ कहा जाता है, वर्तमान में दुबई से अपनी कंपनी का संचालन कर रहे हैं। दुरोव ने 2014 में डेटा प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर रूसी सरकार से हुए विवाद के बाद देश छोड़ दिया था। 2021 में उन्होंने फ्रांस की नागरिकता हासिल की थी।
- पृष्ठभूमि: दुरोव ने टेलीग्राम से पहले रूस के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘वीके’ (VK) की स्थापना की थी।
- वर्तमान स्थिति: रूस में टेलीग्राम पर पहले से ही कई कड़े प्रतिबंध लागू हैं, बावजूद इसके यह आम नागरिकों, सरकारी अधिकारियों और सैन्य कर्मियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है।
- FSS की भूमिका: फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSS) रूस की मुख्य आंतरिक खुफिया एजेंसी है, जिसे पूर्ववर्ती सोवियत संघ की ‘केजीबी’ (KGB) का उत्तराधिकारी माना जाता है। इसका प्राथमिक कार्य आतंकवाद रोकना, सीमा सुरक्षा और साइबर निगरानी सुनिश्चित करना है।
इस ताजा घटनाक्रम ने टेलीग्राम के वैश्विक संचालन और रूस के कड़े डिजिटल कानूनों के बीच एक बड़ा टकराव पैदा कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि दुरोव के खिलाफ यह कार्रवाई रूस की डिजिटल संप्रभुता और सूचनाओं पर नियंत्रण की नीति का हिस्सा है।










