KJo Trivia: कभी अलविदा ना कहना के लिए अभिषेक नहीं थे पहली पसंद


साल 2006 में रिलीज हुई करण जौहर की फिल्म 'कभी अलविदा ना कहना' (KANK) आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित और विवादास्पद फिल्मों में से एक मानी जाती है। शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, अमिताभ बच्चन, प्रीति जिंटा और अभिषेक बच्चन जैसे सितारों से सजी इस फिल्म को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है।…

करण जौहर की कल्ट क्लासिक ‘कभी अलविदा ना कहना’: अभिषेक बच्चन से पहले ये दो सुपरस्टार थे फिल्म की पहली पसंद

साल 2006 में रिलीज हुई करण जौहर की फिल्म ‘कभी अलविदा ना कहना’ (KANK) आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित और विवादास्पद फिल्मों में से एक मानी जाती है। शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, अमिताभ बच्चन, प्रीति जिंटा और अभिषेक बच्चन जैसे सितारों से सजी इस फिल्म को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। दरअसल, अभिषेक बच्चन द्वारा निभाया गया ‘ऋषि तलवार’ का किरदार मेकर्स की पहली पसंद नहीं था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रोल के लिए पहले अजय देवगन और सैफ अली खान से संपर्क किया गया था, लेकिन दोनों ही अभिनेताओं ने व्यस्तता के कारण इसे ठुकरा दिया था।

अभिषेक बच्चन का चयन और ‘युवा’ का प्रभाव

फिल्म के निर्देशक करण जौहर ने अजय देवगन और सैफ अली खान के इनकार के बाद ‘युवा’ फिल्म में अभिषेक बच्चन के अभिनय से प्रभावित होकर उन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए साइन किया। ऋषि तलवार का किरदार फिल्म के सबसे यादगार रोमांटिक पात्रों में से एक बनकर उभरा। इस भूमिका ने न केवल अभिषेक की अभिनय क्षमता को साबित किया, बल्कि उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कारों में लगातार तीसरी बार ‘सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता’ का खिताब भी दिलाया।

फिल्म की कहानी और व्यावसायिक सफलता

न्यूयार्क की पृष्ठभूमि पर बनी ‘कभी अलविदा ना कहना’ उस दौर के पारिवारिक ड्रामा से अलग एक बोल्ड विषय पर आधारित थी। फिल्म मुख्य रूप से दो ऐसे लोगों की कहानी है, जो अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश नहीं हैं और एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं।

  • रिलीज की तारीख: 11 अगस्त, 2006
  • वैश्विक कमाई: लगभग 1.13 बिलियन रुपये
  • उपलब्धि: उस साल की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म
  • पुरस्कार: फिल्म को कुल 23 फिल्मफेयर नामांकन मिले थे

सिनेमाई दृष्टिकोण में बदलाव

करण जौहर के करियर में यह फिल्म एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जाती है। ‘कभी खुशी कभी गम’ और ‘कुछ कुछ होता है’ जैसी फिल्मों के बाद, ‘कभी अलविदा ना कहना’ के जरिए उन्होंने बेवफाई (infidelity) और रिश्तों की जटिलताओं जैसे संवेदनशील विषयों को पर्दे पर पेश किया। फिल्म को भारत के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और यह 20 से अधिक देशों में रिलीज की गई, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ी व्यावसायिक सफलता साबित हुई।