उदयपुर: मदार गांव में जर्जर सड़कों से ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, सेवा केंद्र पर किया प्रदर्शन
उदयपुर के मदार गांव में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और सड़कों की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है। सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने और प्रशासन की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने आज भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केंद्र के बाहर जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि जर्जर सड़क के कारण उनका आवागमन दूभर हो गया है, जिसके चलते बाहरी लोगों और रिश्तेदारों ने भी गांव आना बंद कर दिया है।
भारी वाहनों का दबाव और प्रशासनिक उदासीनता
ग्रामीणों ने अपनी समस्या के पीछे मुख्य रूप से भारी वाहनों के आवागमन को जिम्मेदार ठहराया है। प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव की सड़क की क्षमता मात्र 10 टन वजन सहने की है, लेकिन यहां से भारी डंपर और ट्रक लगातार गुजर रहे हैं। इसके अलावा, आसपास के होटलों का दूषित पानी भी सड़क पर जमा हो रहा है, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है।
- क्षमता से अधिक भार: 10 टन की सड़क पर भारी डंपर गुजरने से सड़क पूरी तरह टूट चुकी है।
- जलभराव की समस्या: होटलों से निकलने वाले पानी के कारण सड़क पर कीचड़ और गड्ढे हो गए हैं।
- बरसात में दुश्वारियां: थूर मोरामाता से मदार तक का मुख्य मार्ग बरसात के दौरान पूरी तरह बंद हो जाता है, जिससे पैदल और दुपहिया वाहन चालकों के लिए निकलना जोखिम भरा हो गया है।
मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
ग्रामीणों का कहना है कि पिछली बरसात में थूर से मदार तक जाने वाली सड़क और पुलिया बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। उस समय प्रशासन ने केवल पेचवर्क (पैच वर्क) कर खानापूर्ति की, जिसके बाद से किसी भी अधिकारी ने सड़क की सुध नहीं ली। ग्रामीणों ने अब प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भारी वाहनों पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया और सड़क का पक्का निर्माण नहीं कराया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
फिलहाल, ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल प्रभाव से सड़क की मरम्मत कराई जाए और भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग सुनिश्चित किया जाए ताकि गांव का संपर्क शहर से पूरी तरह न टूटे।










