भारत में सोने की मांग में 6% की गिरावट, जानें क्या है इसके पीछे की वजह
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भारत में सोने की कुल मांग सालाना आधार पर 6 प्रतिशत घटकर 131.4 टन रह गई है। पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 139.7 टन था। मांग में आई इस कमी के पीछे मुख्य रूप से सोने पर आयात शुल्क (कस्टम ड्यूटी) में बढ़ोतरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोने की खपत को नियंत्रित करने की अपील को जिम्मेदार माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने मई में सोने और चांदी के आयात पर ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था, जिससे घरेलू बाजार में कीमतों में भारी उछाल आया।
कीमतों में उछाल के बावजूद वैल्यू में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
भले ही सोने की मात्रा (वॉल्यूम) में गिरावट दर्ज की गई हो, लेकिन मौद्रिक मूल्य के हिसाब से देश में सोने की खपत ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। WGC इंडिया के रीजनल सीईओ सचिन जैन के मुताबिक, इस तिमाही में सोने की कुल खपत 1,98,100 करोड़ रुपये रही। यह आंकड़ा पिछले साल की दूसरी तिमाही के 1,32,500 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत अधिक है। यह स्पष्ट करता है कि कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद भारतीय उपभोक्ता सोने को निवेश और सुरक्षा के तौर पर प्राथमिकता देना जारी रखे हुए हैं।
बाजार के प्रमुख आंकड़े और प्रभाव
- ज्वैलरी की मांग: अप्रैल-जून तिमाही में आभूषणों की मांग 15 प्रतिशत गिरकर 75.1 टन पर आ गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 88.8 टन थी।
- अंतरराष्ट्रीय कीमतें: दूसरी तिमाही में सोने की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमत 4,506.3 डॉलर प्रति औंस रही, जो पिछले साल 3,280.4 डॉलर थी।
- घरेलू कीमतें: भारत में सोने की औसत तिमाही कीमत (बिना आयात शुल्क और जीएसटी के) 1,50,744.8 रुपये रही, जबकि पिछले वर्ष यह 94,875.9 रुपये थी।
निवेश का रुझान और भविष्य का अनुमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार के संरक्षण की अपील का सीधा असर बाजार पर देखा गया है। हालांकि, ज्वैलरी की मांग में कमी आई है, लेकिन निवेश के उद्देश्य से सोने की खरीदारी में तेजी बनी हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने इस साल भारत में सोने की कुल मांग 650 से 750 टन के दायरे में रहने का अनुमान जताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले त्योहारों और शादी के सीजन के दौरान बाजार में एक बार फिर सकारात्मक सुधार देखने को मिल सकता है।










