दिल्ली लक्ष्मी योजना पर सियासी घमासान: पात्रता शर्तों को लेकर आमने-सामने सरकार और विपक्ष
दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ को लेकर राजधानी का सियासी पारा चढ़ गया है। इस योजना के तहत महिलाओं को प्रतिमाह 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने का वादा किया गया है, लेकिन पात्रता संबंधी कड़े नियमों ने सरकार और विपक्षी दलों के बीच विवाद खड़ा कर दिया है। जहां भाजपा इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने इसे चुनाव से पहले किया गया ‘धोखा’ करार दिया है।
विपक्ष का दावा: शर्तों के जाल में उलझी योजना
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। केजरीवाल का दावा है कि योजना की शर्तें इतनी जटिल हैं कि इसका लाभ पांच लाख महिलाओं को मिलना भी मुश्किल होगा। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयानों का जिक्र करते हुए सरकार पर तंज कसा कि एक तरफ ‘अधिक बच्चे’ पैदा करने की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ तीन से अधिक बच्चों वाली महिलाओं को योजना से बाहर रखा जा रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने योजना की खामियों को गिनाते हुए कहा कि 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को बाहर करना, 10 साल का अनिवार्य निवास प्रमाण पत्र और बिजली खपत की सीमा जैसे नियम वास्तव में लाभार्थियों की संख्या कम करने का एक जरिया हैं। उनके अनुसार, भाजपा ने चुनाव के दौरान हर महिला को सहायता का वादा किया था, लेकिन अब शर्तें लगाकर 62 लाख महिलाओं के साथ वादाखिलाफी की गई है।
भाजपा का बचाव: ‘महिला-नेतृत्व विकास’ पर जोर
विपक्ष के हमलों के बीच भाजपा ने योजना का पुरजोर बचाव किया है। सांसद कमलजीत सहरावत और बांसुरी स्वराज ने कहा कि यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ (Women-led Development) के विजन को समर्पित है। भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि पात्रता शर्तें इसलिए रखी गई हैं ताकि लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं तक ही पहुंचे।
- योजना का लक्ष्य: 21 से 60 वर्ष की आयु वर्ग की लगभग 17 लाख महिलाओं को लाभान्वित करना।
- भाजपा का पक्ष: यह योजना पूर्ववर्ती सरकार की बाधाओं को पार कर महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगी।
- आरोप का जवाब: भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने विपक्ष पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस भी मैदान में, एलजी को सौंपा ज्ञापन
विवाद में अब कांग्रेस भी कूद पड़ी है। प्रदेश कांग्रेस नेता डॉ. नरेश कुमार ने उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को ज्ञापन सौंपकर पात्रता शर्तों को सरल बनाने की मांग की है। कांग्रेस का तर्क है कि योजना के तहत मिलने वाली राशि का बड़ा हिस्सा आरडी (RD) या एफडी (FD) में अनिवार्य रूप से जमा कराने, आय सीमा और सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को बाहर रखने जैसे प्रावधान इसे आम महिलाओं की पहुंच से दूर कर रहे हैं।
फिलहाल, दिल्ली की राजनीति में यह मुद्दा अब एक बड़ा चुनावी और सामाजिक विमर्श बन चुका है, जहां एक ओर सरकार अपनी ‘साफ नियत’ का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे सीमित दायरे वाली योजना बताकर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है।









