केंद्र सरकार ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E-20) का उपयोग पुरानी गाड़ियों के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि 2005 से 2016 के बीच निर्मित BS-3 मानक वाली गाड़ियों में एथेनॉल के कारण रबर के कुछ पार्ट्स और गैस्केट प्रभावित हो सकते हैं, जिन्हें समय रहते बदलना पड़ सकता है।
किन गाड़ियों पर असर और क्या है समाधान?
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह समस्या मुख्य रूप से यूरो-4 मानक से नीचे की उन गाड़ियों में देखी जा रही है, जो 1 अप्रैल 2005 से 2016 के बीच बनी हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि इससे इंजन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता और न ही किसी बड़े तकनीकी बदलाव की आवश्यकता है।
- प्रभावित पार्ट्स: फ्यूल सिस्टम में लगे रबर के पुर्जे जैसे पाइप्स, ओ-रिंग, रबर सील, फ्यूल होज, गैस्केट और इंजेक्टर सील।
- बदलाव की प्रक्रिया: इन पुर्जों को नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से बदला जा सकता है। इसके लिए कोई अलग से बड़ा मेंटेनेंस शेड्यूल नहीं है।
- संभावित खर्च: दोपहिया वाहनों के लिए यह खर्च 500 से 1,500 रुपये, जबकि चारपहिया वाहनों के लिए 2,000 से 8,000 रुपये के बीच हो सकता है (मॉडल और ब्रांड के अनुसार)।
परफॉर्मेंस और माइलेज पर क्या बोले गडकरी?
नितिन गडकरी ने जोर देकर कहा कि विभिन्न सरकारी संस्थानों और ऑटोमोटिव रिसर्च निकायों द्वारा की गई स्टडीज में यह पाया गया है कि E-20 ईंधन से गाड़ियों की कुल परफॉर्मेंस या टिकाऊपन पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ता है।
माइलेज को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि गाड़ी का माइलेज केवल ईंधन के प्रकार पर निर्भर नहीं करता। ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति और वाहन का नियमित रखरखाव माइलेज तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि एथेनॉल का उपयोग दुनिया भर में एक सदी से भी अधिक समय से किया जा रहा है और यह ईंधन मिश्रण तकनीक का ही एक हिस्सा है।
महत्वपूर्ण जानकारी: आपको क्या जानना चाहिए?
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, पुराने रबर पार्ट्स एथेनॉल के लंबे समय तक संपर्क में रहने से सख्त हो सकते हैं या उनमें फुलाव आ सकता है, क्योंकि उस समय के वाहन इस विशिष्ट ईंधन मिश्रण के हिसाब से डिजाइन नहीं किए गए थे। हालांकि, मेटल पार्ट्स पर इसका प्रभाव नगण्य है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि वाहन का उचित रखरखाव किया जाए, तो E-20 पेट्रोल का उपयोग करते समय किसी भी बड़ी तकनीकी समस्या से बचा जा सकता है।










