Latest Update: 7 महीने बाद दर्ज हुई चोरी की FIR, पुलिस ने दी सफाई


मध्य प्रदेश के गुना जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मधुसूदनगढ़ थाना क्षेत्र के दिरौली गांव में लाखों रुपये की चोरी के मामले में पुलिस ने घटना के करीब सात महीने बाद एफआईआर दर्ज की है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद शिकायत करने के बावजूद…

मध्य प्रदेश के गुना जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मधुसूदनगढ़ थाना क्षेत्र के दिरौली गांव में लाखों रुपये की चोरी के मामले में पुलिस ने घटना के करीब सात महीने बाद एफआईआर दर्ज की है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने महीनों तक उन्हें थाने के चक्कर कटवाए और मामले को टालती रही। आखिरकार 28 जुलाई 2026 को पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित टीकाराम शर्मा (48) ने बताया कि चोरी की यह घटना 27 दिसंबर 2025 को हुई थी। उस दिन टीकाराम और उनकी पत्नी घर पर नहीं थे। जब वे शाम को वापस लौटे, तो घर का पिछला दरवाजा टूटा हुआ था और अंदर का सामान बिखरा पड़ा था। अलमारी का ताला तोड़कर चोरों ने सोने के दो मंगलसूत्र और चांदी के आभूषण पार कर दिए थे।

पुलिस की लेटलतीफी पर उठे सवाल

टीकाराम का कहना है कि चोरी की जानकारी उसी दिन मधुसूदनगढ़ थाने को दे दी गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने सात महीने तक मामले को दबाए रखा। पीड़ित के अनुसार, वे लगातार थाने के चक्कर लगाते रहे, लेकिन हर बार उन्हें जांच के नाम पर या अन्य बहाने बनाकर वापस लौटा दिया गया।

  • घटना की तारीख: 27 दिसंबर 2025
  • एफआईआर की तारीख: 28 जुलाई 2026
  • दूरी: करीब 7 महीने का लंबा अंतराल
  • नुकसान: सोने और चांदी के आभूषणों की चोरी

थाना प्रभारी ने मानी देरी

लंबे समय तक कार्रवाई न होने से क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चोरी जैसे मामलों में शुरुआती कुछ घंटे जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन यहां सात महीने की देरी ने आरोपियों के सुराग मिलने की संभावनाओं को कम कर दिया है। इस संबंध में मधुसूदनगढ़ थाना प्रभारी गोपाल चौबे ने देरी स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आते ही एफआईआर दर्ज कर ली गई है और अब नियमानुसार जांच की जा रही है।

फिलहाल, पीड़ित परिवार अब पुलिस की जांच और चोरी गए जेवरात की बरामदगी की बाट जोह रहा है। सात महीने बाद दर्ज हुई इस एफआईआर ने जिले की पुलिसिंग और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।