Sawan Update: रायपुर के इन प्राचीन शिव मंदिरों में छिपे हैं अनोखे रहस्य


हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 का पवित्र सावन मास 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगेगा। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी सावन को लेकर विशेष तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। खारुन नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक हटकेश्वर महादेव…

सावन 2026: रायपुर के शिवालयों में उमड़ी आस्था, गुरुवार से शुरू होगा पवित्र मास

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 का पवित्र सावन मास 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगेगा। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी सावन को लेकर विशेष तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। खारुन नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक हटकेश्वर महादेव मंदिर से लेकर बूढ़ेश्वर महादेव तक, भक्त महादेव की आराधना और जलाभिषेक के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सावन का यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, जिसके चलते पूरे माह शिवालयों में विशेष अनुष्ठान और श्रृंगार किए जाएंगे।

हटकेश्वर महादेव: कलचुरी कालीन इतिहास और आस्था का केंद्र

रायपुर का प्रसिद्ध हटकेश्वर महादेव मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। मंदिर के महंत सुरेश गिरी महाराज के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 1402 ईस्वी में कल्चुरी राजा रामचंद्र के शासनकाल में हाजीराज नाइक द्वारा कराया गया था। भक्तों का अटूट विश्वास है कि मंदिर में स्थित नंदी के कानों में अपनी मनोकामना कहने से भगवान भोलेनाथ उसे अवश्य पूर्ण करते हैं। हाल के वर्षों में खारुन नदी पर बने लक्ष्मण झूला तर्ज के पुल ने यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा किया है।

सावन 2026: प्रमुख व्रत और त्योहारों की तिथियां

सावन मास में भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व भी मनाए जाएंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं:

  • 2 अगस्त: संकष्टी चतुर्थी
  • 9 अगस्त: कामिका एकादशी
  • 11 अगस्त: सावन मासिक शिवरात्रि
  • 12 अगस्त: श्रावण अमावस्या (हरियाली अमावस्या)
  • 15 अगस्त: हरियाली तीज
  • 17 अगस्त: नाग पंचमी
  • 23 अगस्त: पुत्रदा एकादशी
  • 28 अगस्त: रक्षा बंधन (श्रावणी पूर्णिमा)

बूढ़ेश्वर और अन्य प्रमुख मंदिरों में विशेष आयोजन

बूढ़ातालाब के समीप स्थित बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास लगभग 200 वर्ष पुराना है। मान्यता है कि यहां शिवलिंग पर हमेशा सांपों का पहरा रहता था, जिसके बाद इस स्थान पर मंदिर की स्थापना की गई। वर्तमान में पुष्टिकर समाज द्वारा संचालित इस मंदिर में शिव परिवार के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। सावन के दौरान यहां भव्य आरती और विशेष पूजन किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी तैयारियां जोरों पर हैं:

  • श्री सुरेश्वर महादेव पीठ (खम्हारडीह): भगवान का विशेष श्रृंगार और भक्तों के लिए प्रसादी का वितरण किया जाएगा।
  • बैद्यनाथ धाम (बैजनाथ पारा): यहां शिवार्चन और अभिषेक के विशेष आयोजन होंगे।
  • श्री नीलकंठेश्वर महादेव (भाठागांव): रजत और पुष्पों से बाबा का भव्य श्रृंगार होगा। सुबह रुद्राभिषेक और शाम को आरती का आयोजन किया जाएगा।

सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इसी मास में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। यही कारण है कि सावन के सोमवार का व्रत और इस पूरे महीने में किए गए जलाभिषेक व रुद्राभिषेक का विशेष फल प्राप्त होता है।