गुना में गुरु पूर्णिमा पर आस्था का सैलाब: मंदिरों और आश्रमों में गूंजी गुरु महिमा
गुना जिला मुख्यालय सहित समूचे अंचल में सोमवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व पूरी श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। गुरु-शिष्य परंपरा के इस पावन दिवस पर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों, आश्रमों और संत धामों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। शिष्यों ने अपने गुरुदेवों के चरणों में नमन कर आशीर्वाद लिया, वहीं विभिन्न धार्मिक स्थलों पर विशेष अनुष्ठान, हवन-यज्ञ और महाप्रसाद का आयोजन किया गया।
पंचमुखी हनुमान मंदिर और बजरंगगढ़ में विशेष आयोजन
शहर के कैंट स्थित श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में भव्य आयोजन हुए। यहाँ भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और गुरुदेव की चरण पादुकाओं का पूजन किया। संतों को वस्त्र और श्रीफल भेंटकर सम्मान व्यक्त करने के बाद विशाल हवन-यज्ञ संपन्न हुआ, जिसके बाद आयोजित भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया।
बजरंगगढ़ क्षेत्र में भी भक्ति का माहौल रहा। स्वामी राम प्रपन्नाचार्य महाराज के सानिध्य में आचार्य कुटी गौशाला में गुरु वंदना का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहाँ विद्वानों ने गुरु महिमा पर अपने विचार रखे। साथ ही, औद्यानिकी मंदिर में चल रहे अखंड रामायण पाठ की पूर्णाहुति हवन और महाआरती के साथ हुई।
नपाध्यक्ष ने की शहर की सुख-समृद्धि की कामना
नगर पालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने पंचमुखी बालाजी मंदिर पहुंचकर गुरुदेव सियाराम दास महाराज का पूजन-अर्चन किया और उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। वे अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले मार्गदर्शक हैं। उन्होंने नगर की खुशहाली और नागरिकों की सुख-समृद्धि के लिए मंगल कामना की।
कस्तूरबा कन्या महाविद्यालय में गुरु महिमा का व्याख्यान
शैक्षणिक संस्थानों में भी गुरु पूर्णिमा का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। शासकीय कस्तूरबा कन्या महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. नरेंद्र शर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन को संस्कार और सही दिशा भी प्रदान करते हैं।
- प्राचार्या का संदेश: डॉ. विनीता जैन ने छात्राओं को गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखने के लिए प्रेरित किया।
- प्रमुख उपस्थिति: कार्यक्रम में पूनम पारीक, विधि जैन, प्रशांत आर्य, माधवी सालुंके और केके नंदा सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।
- आयोजन का उद्देश्य: नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता से परिचित कराना।










