FCI Update: राजस्थान के गोदामों में सबसे ज्यादा अनाज बर्बाद, 36 करोड़ का नुकसान


राजस्थान में इस साल भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में रखा 2089 टन अनाज बारिश और प्राकृतिक आपदाओं की भेंट चढ़ गया है। इस नुकसान के साथ राजस्थान देश में पहले पायदान पर पहुंच गया है। लोकसभा में सांसद हनुमान बेनीवाल और चंद्रशेखर आजाद द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय खाद्य…

राजस्थान में भारी बारिश से एफसीआई के 2089 टन अनाज का नुकसान, देश में सबसे खराब स्थिति

राजस्थान में इस साल भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में रखा 2089 टन अनाज बारिश और प्राकृतिक आपदाओं की भेंट चढ़ गया है। इस नुकसान के साथ राजस्थान देश में पहले पायदान पर पहुंच गया है। लोकसभा में सांसद हनुमान बेनीवाल और चंद्रशेखर आजाद द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय खाद्य वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभणियां ने यह जानकारी साझा की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नुकसान गोदामों के प्रबंधन की कमी के कारण नहीं, बल्कि चक्रवात, अचानक आई बाढ़ और भारी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं के चलते हुआ है।

पांच साल का रिकॉर्ड: राजस्थान में बर्बादी में अप्रत्याशित उछाल

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में पिछले पांच वर्षों की तुलना में इस बार अनाज का नुकसान सबसे अधिक है। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति चिंताजनक रही है:

  • वर्ष 2024 (वर्तमान): 2089 टन
  • वर्ष 2023-24: 6 टन
  • वर्ष 2022-23: 136 टन
  • वर्ष 2021-22: 63 टन
  • वर्ष 2023-24 (तुलनात्मक): हरियाणा में 2511 टन और पंजाब में 7746 टन अनाज खराब हुआ था।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में अनाज की बर्बादी के आंकड़े सर्वाधिक थे, जबकि इस वर्ष राजस्थान ने इस सूची में शीर्ष स्थान ले लिया है।

देशभर में करोड़ों का अनाज हुआ बर्बाद

देशभर में एफसीआई के गोदामों में खाद्यान्न की बर्बादी का आर्थिक आंकड़ा भी काफी बड़ा है। पिछले पांच वर्षों में देशभर में करीब 36 करोड़ रुपये मूल्य का अनाज नष्ट हुआ है। वार्षिक नुकसान का ब्यौरा इस प्रकार है:

  • 2021-22 और 2022-23: कुल 5 करोड़ रुपये (प्रत्येक वर्ष 2.5 करोड़)
  • 2023-24: 14.5 करोड़ रुपये
  • 2024-25: 13.9 करोड़ रुपये
  • 2025-26: 3.20 करोड़ रुपये

भंडारण क्षमता के आधुनिकीकरण पर जोर

अनाज की बर्बादी को रोकने और भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार अब साइलो (Silos) तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर रही है:

  • निर्मित साइलो: 79 स्थानों पर 39 लाख टन क्षमता के साइलो पहले ही बनाए जा चुके हैं।
  • जारी कार्य: 59 स्थानों पर 25.62 लाख टन क्षमता के साइलो का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
  • भविष्य की योजना: अगले चरण में 54 स्थानों पर 25 लाख टन क्षमता के साइलो बनाने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।

सरकार का दावा है कि इन आधुनिक साइलो के निर्माण से भविष्य में खाद्यान्न को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और भंडारण क्षमता में गुणात्मक सुधार होगा।