Delhi News: जिमखाना क्लब विवाद पर केंद्र का हाईकोर्ट में बड़ा बयान


दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन के मालिकाना हक और लीज समाप्ति को लेकर छिड़े कानूनी संग्राम में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपना रुख कड़ा कर लिया है। केंद्र ने अदालत को स्पष्ट रूप से बताया है कि 'सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम' (PP Act) के तहत चल रही कानूनी…

दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद: केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में कहा, बेदखली की प्रक्रिया पर न्यायिक रोक संभव नहीं

दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन के मालिकाना हक और लीज समाप्ति को लेकर छिड़े कानूनी संग्राम में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपना रुख कड़ा कर लिया है। केंद्र ने अदालत को स्पष्ट रूप से बताया है कि ‘सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम’ (PP Act) के तहत चल रही कानूनी प्रक्रिया में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती। सरकार का तर्क है कि कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि ऐसी बेदखली की कार्यवाही पर सिविल अदालतें स्थगन आदेश (Stay) नहीं दे सकतीं।

लीज समाप्ति संविदात्मक अधिकार का हिस्सा

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह मामला भूमि अधिग्रहण का नहीं, बल्कि वर्ष 1928 में हुए लीज समझौते की शर्तों का पालन है। सरकार के अनुसार, 22 मई 2026 को लीज समाप्त करने का निर्णय मूल अनुबंध में निहित उन शर्तों के तहत लिया गया है, जो सार्वजनिक हित में जमीन वापस लेने का अधिकार सरकार को देती हैं। सरकार ने जोर देकर कहा कि लीज खत्म होने के बाद क्लब का परिसर पर कोई वैधानिक अधिकार नहीं बचता है और एस्टेट ऑफिसर द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पूरी तरह कानून सम्मत है।

कानूनी दांव-पेच और अगली सुनवाई

जस्टिस अवनीश झिंगन की अदालत में सुनवाई के दौरान क्लब सदस्य विजय खुराना और क्लब कर्मचारियों की याचिकाओं पर चर्चा हुई। याचिकाकर्ताओं ने एस्टेट ऑफिसर की कार्यवाही को चुनौती दी है, जबकि केंद्र सरकार ने इसे ‘गलत मंच’ करार दिया है।

  • केंद्र का पक्ष: याचिकाकर्ता एस्टेट ऑफिसर के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराएं; कानून के तहत वही सक्षम प्राधिकारी हैं।
  • याचिकाकर्ताओं का तर्क: सरकार ने ‘रक्षा अवसंरचना’ के जो कारण बताए हैं, वे अस्पष्ट हैं और यह प्रक्रिया बिना उचित कानूनी आधार के अपनाई जा रही है।
  • अदालत का निर्देश: सुनवाई के दौरान सरकार ने आश्वासन दिया है कि मामले में अगली तारीख तक एस्टेट ऑफिसर के स्तर पर प्रक्रिया जारी रहेगी, जिसे अदालत ने संज्ञान में लिया है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह पूरा विवाद तब गहराया जब भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने 22 मई 2026 को क्लब की स्थायी लीज को रद्द कर दिया। इसके पीछे ‘रक्षा अवसंरचना को मजबूत करने’ का तर्क दिया गया। इसके बाद 29 जून को एस्टेट ऑफिसर बिपिन कुमार सिंह ने बेदखली का कारण बताओ नोटिस जारी किया। वर्तमान में, क्लब के एक बड़े धड़े का प्रतिनिधित्व कर रहे विजय खुराना ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से मनमाना करार दिया है।

फिलहाल, दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को केंद्र के जवाब पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को निर्धारित की गई है, जो इस ऐतिहासिक क्लब के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।