राजसमंद में मानसून की बेरुखी: प्रमुख बांधों में पानी की भारी कमी से बढ़ी चिंता
राजस्थान के राजसमंद जिले में इस साल मानसून की कमजोर सक्रियता ने प्रशासन और किसानों की नींद उड़ा दी है। जिले के 25 प्रमुख जलाशयों में अब तक संतोषजनक पानी की आवक नहीं हुई है, जिससे आने वाले महीनों में पेयजल संकट और सिंचाई की समस्या गहराने के आसार हैं। हालांकि छिटपुट बारिश दर्ज की गई है, लेकिन गोमती और बनास जैसी प्रमुख नदियों में बहाव न होने के कारण बांधों के जलस्तर में कोई खास इजाफा नहीं हुआ है।
राजसमंद झील और अन्य बांधों की वर्तमान स्थिति
जिले की लाइफलाइन मानी जाने वाली राजसमंद झील पर मानसून की कमी का सीधा असर दिख रहा है। 3,786 एमसीएफटी की कुल क्षमता वाली इस झील का पूर्ण भराव स्तर 30 फीट है, जबकि वर्तमान में यह केवल 19.80 फीट पर अटकी हुई है। इसमें अभी 2,084 एमसीएफटी पानी ही उपलब्ध है, और इस मानसून सीजन में अब तक कोई नई आवक दर्ज नहीं की गई है।
अन्य प्रमुख बांधों का हाल भी कुछ ऐसा ही है:
- नंदसमंद बांध (नाथद्वारा): इसकी कुल क्षमता 750 एमसीएफटी है, लेकिन वर्तमान में जलस्तर मात्र 14.90 फीट है, जिसमें केवल 180 एमसीएफटी पानी शेष बचा है।
- चिकलवास बांध: 400 एमसीएफटी क्षमता वाला यह बांध अपने पूर्ण गेज से करीब 11 फीट नीचे खाली पड़ा है।
- बाघेरी नाका बांध: ग्रामीण क्षेत्रों की प्यास बुझाने वाला यह महत्वपूर्ण बांध अपने पूर्ण गेज 32.80 फीट से 12.80 फीट नीचे चल रहा है।
प्रशासन और किसानों के लिए बढ़ता संकट
लगातार खाली पड़े जलाशयों ने स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है, तो जिले में पेयजल आपूर्ति का प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके साथ ही, रबी की फसल की बुवाई के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता को लेकर भी किसान वर्ग बेहद चिंतित है। जल संसाधन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि भविष्य में होने वाली जल किल्लत से निपटने के लिए उचित विकल्प तलाशे जा सकें।









