मध्यप्रदेश महिला आयोग की जनसुनवाई: पिता के अवैध संबंधों से तंग आकर बच्चों ने लगाई गुहार
मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की हालिया जनसुनवाई में एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ दो नाबालिग बच्चों ने अपने ही पिता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बच्चों ने आयोग को बताया कि उनके पिता का पिछले चार वर्षों से पड़ोस में रहने वाली एक महिला के साथ अनैतिक संबंध है, जिसके चलते उनका घर कलह का केंद्र बन गया है। इस घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के कारण उनकी मां गंभीर डिप्रेशन की शिकार हो गई हैं और उन्होंने आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाने की भी कोशिश की है। आयोग ने इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, एक अन्य मामले में फैक्ट्री दुर्घटना में हुई कर्मचारी की मौत के बाद मुआवजा न देने वाली कंपनी को आयोग ने सख्त चेतावनी दी है।
पिता की करतूतों से बच्चों का जीवन संकट में
आयोग के समक्ष उपस्थित नाबालिग बच्चों ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनके पिता का पड़ोसी महिला से अफेयर है। बच्चों के अनुसार:
- पूर्व में पुलिस में शिकायत के बाद पिता ने शपथ पत्र देकर सुधार का वादा किया था, लेकिन वे अब भी उस महिला के संपर्क में हैं।
- आरोपी महिला स्वयं शादीशुदा है और उसके तीन बच्चे हैं, जो आंगनवाड़ी सहायिका के रूप में कार्यरत है।
- बच्चों ने आरोप लगाया कि पिता न केवल मां के साथ मारपीट करते हैं, बल्कि बच्चों को भी प्रताड़ित करते हैं।
- लगातार हो रहे मानसिक शोषण के कारण मां को डिप्रेशन की दवाइयां लेनी पड़ रही हैं और उनका उपचार जारी है।
फैक्ट्री हादसे में मुआवजे को लेकर कंपनी पर कार्रवाई
जनसुनवाई के दौरान दूसरा बड़ा मामला मंडीदीप की एक फैक्ट्री से जुड़ा था। वहां वेयरहाउस में गेहूं की बोरियों के नीचे दबने से एक कर्मचारी की दर्दनाक मौत हो गई थी। मृतक की पत्नी ने आयोग में शिकायत की कि कंपनी की ओर से उन्हें अभी तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है। कंपनी का कोई प्रतिनिधि सुनवाई में नहीं पहुंचा, जिसके बाद आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई में कंपनी का जिम्मेदार व्यक्ति अनिवार्य रूप से उपस्थित हो। यदि कंपनी ने सहयोग नहीं किया, तो उनके खिलाफ वारंट जारी करने की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पारिवारिक विवादों का निपटारा और आयोग की पहल
महिला आयोग की इस जनसुनवाई में कुल 18 मामलों की सुनवाई की गई, जिसमें घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर प्रताड़ना और पारिवारिक विवाद जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे। आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव, सदस्य साधना स्थापक और सचिव सुरेश तोमर की मौजूदगी में कई मामलों में सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले। एक मामले में पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति और समझाइश से समझौता कराया गया, जिसके बाद महिला ने अपनी शिकायत वापस ले ली। आयोग का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को न्याय दिलाना और परिवारों को बिखरने से बचाना है, जिसके लिए हर मामले की गंभीरता से समीक्षा की जा रही है।









