Highcourt: दोहरे हत्याकांड में दोषी की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली


राजस्थान हाईकोर्ट ने जालोर के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा दो भाइयों को दी गई मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चन्द्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यद्यपि यह अपराध अत्यंत गंभीर और जघन्य है,…

जालोर दोहरे हत्याकांड: राजस्थान हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला

राजस्थान हाईकोर्ट ने जालोर के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा दो भाइयों को दी गई मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चन्द्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यद्यपि यह अपराध अत्यंत गंभीर और जघन्य है, लेकिन यह कानूनी रूप से ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभतम से दुर्लभ) श्रेणी की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है। न्यायालय ने दोनों दोषियों की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है, लेकिन उनकी फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है।

क्या था मामला और क्यों मिली थी मौत की सजा?

यह घटना जालोर जिले के रामसीन थाना क्षेत्र की है, जहाँ आटा-साटा विवाह (अदला-बदली की शादी) के विवाद ने खूनी रूप ले लिया था। 3 मार्च 2023 को आरोपी भाइयों, पहाड़ सिंह और डूंगर सिंह ने अपनी भाभी इंद्रा कंवर पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला कर दिया था, क्योंकि उन्होंने अपनी बेटी की शादी आटा-साटा में करने से इनकार कर दिया था। इस हमले में इंद्रा कंवर की मौके पर ही मौत हो गई थी। जब पड़ोसी हरि सिंह बीच-बचाव करने आए, तो आरोपियों ने उन पर भी कुल्हाड़ी से वार कर उनकी हत्या कर दी थी। भीनमाल की अतिरिक्त सत्र अदालत ने 9 दिसंबर 2025 को दोनों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने संशोधित किया है।

कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों का विश्लेषण

  • अभियोजन पक्ष की मजबूती: हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों, मेडिकल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए अपना पक्ष पूरी तरह साबित किया है।
  • हाईकोर्ट का रुख: अदालत ने कहा कि अपराध की प्रकृति जघन्य है, लेकिन मौत की सजा देने के लिए जो कठोर मापदंड तय किए गए हैं, यह मामला उन सीमाओं के भीतर नहीं आता।
  • पुलिस की तत्परता: घटना के दौरान मोदरा पुलिस चौकी के सहायक पुलिस निरीक्षक सुरेंद्र सिंह राव ने मौके पर पहुँचकर न केवल बच्चों की जान बचाई थी, बल्कि आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था।

आटा-साटा विवाद बना दो जिंदगियों के खात्मे का कारण

जांच में सामने आया कि आरोपी पहाड़ सिंह और डूंगर सिंह अपनी शादी के लिए अपनी भतीजी को आटा-साटा में देने की जिद पर अड़े थे। इसी पारिवारिक विवाद ने दोहरे हत्याकांड को जन्म दिया। आरोपियों ने न केवल महिलाओं और पड़ोसियों को निशाना बनाया, बल्कि पुलिस अधिकारी पर भी हमला करने की कोशिश की थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह निर्णय न्यायिक दृष्टिकोण से संतुलन बनाने वाला है, जिसमें अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा को उम्रकैद में सीमित किया गया है।