रायसेन में बड़ा हादसा टला: उफनती घोघरा नदी के बीच फंसे 9 मजदूर, रेस्क्यू टीम ने बचाई जान
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के बरेली क्षेत्र में मंगलवार को अचानक हुई मूसलाधार बारिश ने एक गंभीर संकट पैदा कर दिया। घोघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से खेतों में धान की रोपाई कर रहे 9 मजदूर बीच पानी में फंस गए। चारों तरफ पानी के तेज बहाव के कारण मजदूरों का बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों से मिली सूचना के तुरंत बाद जिला होमगार्ड की डिजास्टर रेस्क्यू टीम (DRC) और बरेली थाना पुलिस ने मोर्चा संभाला। बचाव दल ने बिना समय गंवाए नाव की मदद से पानी के बीच फंसे सभी मजदूरों तक पहुंच बनाई और एक-एक करके सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। यह सफल रेस्क्यू ऑपरेशन जिला होमगार्ड कमांडेंट उमेश कुमार तिवारी के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
रेस्क्यू टीम की मुस्तैदी और सुरक्षित बचाए गए मजदूर
इस कठिन बचाव अभियान में होमगार्ड टीम के प्रभारी नायक परसराम मेहरा, सैनिक विजय सिंह, राजेश शर्मा, जीवन सिंह ठाकुर, ब्रजेन्द्र राजपूत और शम्भूप्रसाद ने अपनी जान जोखिम में डालकर समय पर मदद पहुंचाई। रेस्क्यू टीम की तत्परता के कारण बड़ा हादसा टल गया। सुरक्षित बचाए गए सभी मजदूर छिंदवाड़ा जिले के निवासी हैं, जिनकी पहचान इस प्रकार है:
- मोहनवती (20) और मोनिस (18)
- प्रमिला (18) और लक्ष्मन्या (45)
- सविता (34) और सुखराम (30)
- रामकुमार (24), शंकर (30) और रोहित (25)
सुरक्षित बाहर निकलने के बाद सभी मजदूरों ने राहत की सांस ली और होमगार्ड की पूरी टीम का तहे दिल से आभार व्यक्त किया। बताया जा रहा है कि आसपास की पहाड़ियों से पानी आने के कारण घोघरा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था, जिससे खेतों में काम कर रहे लोग घिर गए थे।
जिला प्रशासन की सख्त चेतावनी: जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें
इस घटना के बाद जिला प्रशासन और होमगार्ड विभाग ने आम जनता के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि:
- वर्षा ऋतु के दौरान नदी-नालों के आसपास जाने से बचें, क्योंकि इनका जलस्तर कभी भी अचानक बढ़ सकता है।
- उफनते हुए नदी-नालों को पार करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं।
- जलभराव वाले खेतों या निचले इलाकों में काम करते समय मौसम के मिजाज पर पैनी नजर रखें।
- किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा राहत दल को सूचित करें।
प्रशासन ने साफ किया है कि मानसून के दौरान सावधानी ही बचाव का सबसे बेहतर तरीका है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।









