Patwari सस्पेंड: जनप्रतिनिधि से बदतमीजी पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई


सीहोर जिले के इछावर तहसील में पदस्थ एक पटवारी पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पटवारी ऋषि यादव पर आरोप है कि उन्होंने एक जनप्रतिनिधि के साथ न केवल अभद्र व्यवहार किया, बल्कि अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल भी किया। यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया…

इछावर में पटवारी निलंबित: जनप्रतिनिधि से अभद्रता और मंत्रियों पर टिप्पणी करना पड़ा भारी

सीहोर जिले के इछावर तहसील में पदस्थ एक पटवारी पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पटवारी ऋषि यादव पर आरोप है कि उन्होंने एक जनप्रतिनिधि के साथ न केवल अभद्र व्यवहार किया, बल्कि अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल भी किया। यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप तेजी से वायरल हो गई। इस ऑडियो में पटवारी द्वारा जनप्रतिनिधि के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के राजस्व मंत्री के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी करने की बात सामने आई है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।

वायरल ऑडियो और कारण बताओ नोटिस

मामला इछावर तहसील के हल्का नंबर-29, ग्राम रामदासी से जुड़ा है। ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। इछावर तहसीलदार ने 9 जुलाई को पटवारी ऋषि यादव को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा था। हालांकि, पटवारी द्वारा प्रस्तुत किया गया स्पष्टीकरण प्रशासन को संतोषजनक नहीं लगा। प्रशासन ने इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 का सीधा उल्लंघन माना और अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया।

निलंबन आदेश और विभागीय जांच के निर्देश

अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) इछावर ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत निलंबन की कार्रवाई की है। इस संबंध में मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • निलंबन अवधि के दौरान पटवारी ऋषि यादव का मुख्यालय तहसील कार्यालय इछावर निर्धारित किया गया है।
  • नियमों के अनुसार, उन्हें निलंबन काल में जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता बनी रहेगी।
  • राजस्व कार्यों में बाधा न आए, इसके लिए ग्राम रामदासी का संपूर्ण प्रभार पटवारी प्रियंका मिश्रा को सौंप दिया गया है।
  • प्रशासन ने तहसीलदार को निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर आरोप पत्र, साक्ष्य और दस्तावेजों के साथ विस्तृत विभागीय जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

आने वाले समय में विभागीय जांच की रिपोर्ट के आधार पर ही पटवारी के खिलाफ भविष्य की कड़ी कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन का यह कदम सरकारी कर्मचारियों के बीच अनुशासन बनाए रखने के लिए एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।