आरपीएससी फर्जी डिग्री मामला: मेवाड़ यूनिवर्सिटी के पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक सुशील कुमार शर्मा गिरफ्तार
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित स्कूल व्याख्याता (हिंदी) भर्ती परीक्षा में फर्जी डिग्री का इस्तेमाल करने के चर्चित मामले में एसओजी (SOG) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक सुशील कुमार शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी सुशील कुमार शर्मा ने सोमवार को अपर जिला एवं सेशन न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। इससे पूर्व उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए सरेंडर करने के बाद एसओजी ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ निवासी शर्मा के विरुद्ध आयोग की शिकायत पर सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया था। समर्पण की सूचना मिलते ही सरकारी वकील शशि प्रकाश इन्दोरिया ने अनुसंधान अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्याम सुंदर विश्नोई को अवगत कराया, जिसके बाद एसओजी ने अदालत परिसर से ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
अब तक 15 आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
इस पूरे मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक कुल 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें ब्रह्माकुमारी और कमला कुमारी जैसी अभ्यर्थियों के नाम भी शामिल हैं।
- मामले की पृष्ठभूमि: आरपीएससी के वरिष्ठ उप सचिव अजय सिंह चौहान ने सिविल लाइन्स थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि वर्ष 2022 की हिंदी स्कूल व्याख्याता परीक्षा में अभ्यर्थियों ने फर्जी दस्तावेज लगाए थे।
- फर्जीवाड़ा: मुख्य रूप से मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार (चित्तौड़गढ़) की एमए की डिग्रियों को फर्जी पाया गया था।
- परीक्षा प्रक्रिया: 15 अक्टूबर 2022 को आयोजित इस परीक्षा में सामान्य ज्ञान और हिंदी विषय की परीक्षा दो पारियों में हुई थी।
- खुलासा कैसे हुआ: परीक्षा पास करने के बाद जब 14 जून 2023 को परिणाम आया, तो डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जिसके बाद पुलिस ने मामला एसओजी को सौंप दिया।
लेक्चरर भर्ती 2022 में फर्जीवाड़े का जाल
हाल ही में एसओजी ने इस मामले में एक और सहयोगी आरोपी को भी गिरफ्तार किया है, जिसे 13 जुलाई को पकड़ा गया था। उसे अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया ताकि फर्जी डिग्री गिरोह के अन्य नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। आरपीएससी की इस प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षा में हुई धांधली ने प्रदेश के शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है, और एसओजी लगातार उन सभी लोगों की तलाश कर रही है जिन्होंने इस फर्जीवाड़े में मदद की थी।









