लोकतंत्र की मजबूती के लिए विधायिका का जागरूक होना जरूरी: सतीश महाना

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने लोकतंत्र की नींव को और अधिक मजबूत बनाने के लिए विधायिका की सक्रियता और जिम्मेदारी पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारे संविधान ने विधायिका को अपार शक्तियां दी हैं, जिनका उपयोग जनहित में किया जाना चाहिए। महाना के अनुसार, एक विधायक की असली पहचान उसके…

लोकतंत्र की मजबूती के लिए विधायिका का सजग होना जरूरी: सतीश महाना

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने लोकतंत्र की नींव को और अधिक मजबूत बनाने के लिए विधायिका की सक्रियता और जिम्मेदारी पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारे संविधान ने विधायिका को अपार शक्तियां दी हैं, जिनका उपयोग जनहित में किया जाना चाहिए। महाना के अनुसार, एक विधायक की असली पहचान उसके विधानसभा में किए गए कार्यों और वहां रखी गई बातों से होती है, इसलिए जनप्रतिनिधियों को अपनी भूमिका के प्रति सदैव जागरूक रहना चाहिए।

बिहार के गया में आयोजित दो दिवसीय ‘प्रबोधन कार्यक्रम’ को संबोधित करते हुए उन्होंने संसदीय परंपराओं और विधायी प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत में सत्ता का संचालन जनता द्वारा दिए गए मत यानी बैलेट की शक्ति से होता है। इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में सहमति और असहमति के बीच सार्थक संवाद ही वह माध्यम है, जिससे देश की प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने विधायकों को सलाह दी कि वे संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करते हुए अपना दायित्व निभाएं।

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संवैधानिक मर्यादा और जनप्रतिनिधियों का दायित्व

  • लोकतंत्र के चारों स्तंभों को अपनी निर्धारित सीमाओं और संवैधानिक दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए।
  • जनप्रतिनिधियों को जनता से केवल वही वादे करने चाहिए, जिन्हें पूरा करना व्यावहारिक रूप से संभव हो।
  • विधानसभा की समितियां कार्यपालिका की जवाबदेही तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • बदलते दौर में विधायकों का तकनीकी रूप से दक्ष और अध्ययनशील होना अनिवार्य है।

सतीश महाना ने आगे कहा कि जनप्रतिनिधि और जनता के बीच कायम अटूट विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनहित के कार्यों को करने के लिए ईमानदारी और निष्ठा का होना बेहद जरूरी है। जब जनता को यह अहसास होता है कि उनका चुना हुआ प्रतिनिधि उनके हितों के लिए निरंतर संघर्ष कर रहा है, तभी लोकतांत्रिक व्यवस्था सही मायनों में फलीभूत होती है। इसके साथ ही उन्होंने समितियों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने का आह्वान किया।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने तकनीकी युग की चुनौतियों का भी जिक्र किया। महाना ने कहा कि आज के दौर में विधायकों को न केवल संसदीय प्रक्रियाओं का गहरा ज्ञान होना चाहिए, बल्कि उन्हें तकनीक के माध्यम से भी खुद को अपडेट रखना चाहिए। तभी वे जनता की बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे और लोकतंत्र की गरिमा को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकेंगे।