यूपी में कृषि भर्ती पर सियासत: ‘आप’ ने सरकार पर लगाया आरक्षण में धांधली का आरोप
लखनऊ में आम आदमी पार्टी (आप) ने उत्तर प्रदेश सरकार पर कृषि तकनीकी सहायक भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि राज्य सरकार ने आरक्षण के संवैधानिक नियमों को दरकिनार करते हुए पिछड़े, दलित और आदिवासी वर्ग के युवाओं के साथ बड़ा धोखा किया है। ‘आप’ के अयोध्या प्रांत अध्यक्ष विनय पटेल ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि कुल 2,759 पदों पर होने वाली इस भर्ती में आरक्षित वर्गों को उनके हक से वंचित रखा गया है, जो सीधे तौर पर सामाजिक न्याय का उल्लंघन है।
पार्टी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, नियमों के मुताबिक एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को कुल 1,380 पद मिलने चाहिए थे, लेकिन सरकार ने इन्हें घटाकर मात्र 792 पद ही दिए हैं। इस तरह आरक्षित वर्ग के 588 पद कम कर दिए गए हैं। विनय पटेल ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि जहां एक ओर ओबीसी और एससी के आरक्षण को सीमित किया गया है, वहीं ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को पूरी तरह से लागू रखा गया है, जो सरकार की भेदभावपूर्ण नीति को दर्शाता है।
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आरक्षण में कटौती पर ‘आप’ का बड़ा हमला
आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह केवल एक भर्ती की बात नहीं है, बल्कि प्रदेश भर में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के नियमों को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है।
- 69 हजार शिक्षक भर्ती: पार्टी ने आरोप लगाया कि पूर्व की शिक्षक भर्ती में भी इसी तरह आरक्षण के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई थीं।
- संस्थानों में धांधली: बांदा कृषि विश्वविद्यालय और लखीमपुर सहकारी बैंक की भर्तियों में भी एक विशेष वर्ग को लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
- सहयोगी दलों पर निशाना: भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल दलित और पिछड़ा वर्ग के नेताओं की चुप्पी पर भी ‘आप’ ने सवाल उठाए हैं।
अंत में विनय पटेल ने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रदेश का युवा अब इन सब बातों को देख और समझ रहा है। आगामी चुनाव में रोजगार और आरक्षण का मुद्दा सबसे अहम होगा और युवा अपने वोट के जरिए सरकार से इन नाइंसाफियों का हिसाब मांगेंगे। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को लेकर चुप नहीं बैठेंगे और इसे जन-आंदोलन के रूप में प्रदेश के हर कोने तक पहुंचाएंगे।





