श्री बद्रीनाथ धाम चढ़ावा चोरी मामला: जांच तेज, आरोपी पीए की गिरफ्तारी की अटकलें
उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध श्री बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की राशि में हेराफेरी और चोरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस गंभीर प्रकरण की जांच के लिए गढ़वाल मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो घटना के हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है। इस बीच, चर्चाएं तेज हैं कि मामले में नामजद आरोपी और निलंबित वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं, हालांकि फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया है। नौटियाल के खिलाफ अनियमितताओं के पुख्ता आरोप सामने आने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। मंदिर प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि संस्थान की गरिमा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे जरूरी है। समिति ने यह भी साफ कर दिया है कि किसी भी स्तर पर पाई गई गड़बड़ी के लिए सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
आरोपों की लंबी फेहरिस्त और जांच का दायरा
- वीआईपी दर्शन के नाम पर अवैध वसूली: आरोपी प्रमोद नौटियाल पर वीआईपी दर्शन कराने के एवज में प्रति श्रद्धालु 1100 रुपये वसूलने का गंभीर आरोप है।
- भैरव सेना द्वारा खुलासा: हिंदूवादी संगठन ‘भैरव सेना’ ने सबसे पहले दानपात्र की राशि में हेराफेरी का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा।
- सीसीटीवी फुटेज की जांच: मामले की सच्चाई तक पहुंचने के लिए मंदिर के दान और चढ़ावा क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया है।
- निलंबन और संबद्धता: आरोपी को बीकेटीसी कार्यालय, ज्योतिर्मठ से संबद्ध किया गया है और मामले में चार सदस्यीय टीम जांच कर रही है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मंदिर समिति के कुछ कर्मचारियों पर चढ़ावे की गिनती के दौरान हेरफेर के आरोप लगे। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में भी उबाल है। विपक्ष ने इस घटना को करोड़ों सनातनियों की आस्था के साथ खिलवाड़ करार दिया है, वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि देवस्थान बोर्ड के न होने के कारण ऐसी घटनाओं को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। फिलहाल, मंदिर समिति ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है और कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।





