Chaturmas 2026: देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्यों सो जाते हैं? जानें खास कारण

भगवान विष्णु की योगनिद्रा का धार्मिक महत्वImage Credit source: Unsplash

भगवान विष्णु की योगनिद्रा का धार्मिक महत्वImage Credit source: Unsplash

चातुर्मास 2026: कब से शुरू हो रहा है देवों का शयनकाल?

सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व माना गया है। यह चार महीनों की वह अवधि है, जो आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी से शुरू होकर कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी तक चलती है। इन चार महीनों में जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु सृष्टि के संचालन से विश्राम लेकर योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसे ‘देवताओं का शयनकाल’ कहा जाता है।

भगवान विष्णु के विश्राम के कारण, इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। यह समय सांसारिक मोह-माया से दूर रहकर आध्यात्मिक साधना, जप और तप के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है, जिससे चातुर्मास का शुभारंभ होगा। क्या आप जानते हैं कि भगवान विष्णु योगनिद्रा में क्यों जाते हैं? इसके पीछे के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

योगनिद्रा के पीछे की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने अपने वामन अवतार में दैत्यराज बलि से तीन पग भूमि का दान मांगा था। भगवान ने अपने पहले पग में पूरी पृथ्वी और दूसरे पग में संपूर्ण आकाश को माप लिया। जब तीसरा पग रखने की बारी आई, तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। बलि की अटूट भक्ति और उदारता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए।

भगवान ने बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया और स्वयं वहां के द्वारपाल के रूप में रहने का वचन दिया। जब भगवान विष्णु वैकुंठ छोड़कर पाताल चले गए, तो वहां की व्यवस्था बिगड़ने लगी। तब माता लक्ष्मी ने राजा बलि से भगवान को मुक्त करने का अनुरोध किया। बलि ने माता लक्ष्मी का मान रखते हुए भगवान से प्रार्थना की कि वे वर्ष में चार महीने पाताल लोक में निवास करें। तब से भगवान विष्णु आषाढ़ से कार्तिक तक पाताल लोक में योगनिद्रा में रहते हैं और देवउठनी एकादशी पर पुनः वैकुंठ लौटते हैं।

प्रकृति के संतुलन का काल

धार्मिक दृष्टि से भगवान का योगनिद्रा में जाना संसार में संतुलन स्थापित करने का संकेत है। जहां ब्रह्मा जी सृष्टि के रचयिता हैं और विष्णु जी पालनकर्ता, वहीं शिव जी संहारक हैं। वर्षा ऋतु के दौरान प्रकृति में नया जीवन और हरियाली आती है। भगवान विष्णु का विश्राम काल प्रकृति को पुनः सृजन और संतुलन का अवसर प्रदान करता है। यह समय आत्म-चिंतन और प्राकृतिक चक्र की निरंतरता को समझने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

महत्वपूर्ण बिंदुविवरण
आरंभ तिथि25 जुलाई 2026
अवधि4 महीने
मुख्य कार्यपूजा, जप, तप और साधना

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डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य सूचनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हमारा संस्थान नहीं करता है।