Crime: आदतन बदमाश संग्राम सिंह रात्रे 6 जिलों से जिला बदर

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से कुख्यात निगरानी बदमाश संग्राम सिंह रात्रे के खिलाफ जिला बदर का आदेश जारी किया है। बलौदा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम खिसोरा…

जांजगीर-चांपा में प्रशासन का सख्त एक्शन: आदतन अपराधी संग्राम सिंह रात्रे एक साल के लिए जिला बदर

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से कुख्यात निगरानी बदमाश संग्राम सिंह रात्रे के खिलाफ जिला बदर का आदेश जारी किया है। बलौदा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम खिसोरा निवासी इस अपराधी को अब आगामी एक वर्ष तक जिले की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी।

किन जिलों में रहेगी प्रवेश पर पाबंदी?

आरोपी संग्राम सिंह रात्रे के लिए जिला प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। उसे न केवल जांजगीर-चांपा जिले से बाहर रहना होगा, बल्कि आसपास के अन्य जिलों में भी उसके प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

प्रतिबंधित जिले
जांजगीर-चांपा
सक्ती
रायगढ़
बिलासपुर
कोरबा
बलौदाबाजार

अपराधों की लंबी फेहरिस्त

पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, संग्राम सिंह रात्रे कोई साधारण अपराधी नहीं है, बल्कि वह एक आदतन बदमाश है। उसके खिलाफ दर्ज मामलों का विवरण नीचे दिया गया है:

  • कुल आपराधिक मामले: आरोपी के खिलाफ मारपीट, जान से मारने की धमकी और चोरी जैसे संगीन मामलों में 8 प्रकरण दर्ज हैं।
  • प्रतिबंधात्मक कार्रवाई: आपराधिक प्रवृत्ति को देखते हुए उसके खिलाफ पूर्व में 2 बार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा चुकी है।

क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि संग्राम सिंह रात्रे की आपराधिक गतिविधियों के कारण स्थानीय निवासियों में भारी दहशत का माहौल था। आरोपी का खौफ इतना अधिक था कि आम नागरिक उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से भी कतराते थे। क्षेत्र की शांति व्यवस्था को बहाल रखने और जनता में सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए पुलिस अधीक्षक ने कलेक्टर को विस्तृत रिपोर्ट भेजी थी।

इस रिपोर्ट के आधार पर, छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 3 एवं 5 के तहत जिला दंडाधिकारी (कलेक्टर) ने आरोपी को एक वर्ष के लिए जिला बदर करने का आदेश पारित किया है। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि क्षेत्र में कानून को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और आदतन अपराधियों पर नकेल कसने का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।