सीधी: बारिश के बाद जलभराव से डूबी आदिवासी बस्ती, स्कूली बच्चों की राह बनी कठिन
सीधी जिले के सिहावल जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पहाड़ी की आदिवासी बस्ती इन दिनों भारी बारिश के कारण जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रही है। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि बस्ती को जोड़ने वाला करीब आधा किलोमीटर लंबा मुख्य मार्ग पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। जलभराव के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और ग्रामीणों का घर से बाहर निकलना भी दूभर हो गया है।
सबसे अधिक परेशानी का सामना मासूम स्कूली बच्चों को करना पड़ रहा है। रास्ते में घुटनों तक पानी भरा होने के कारण पिछले दो दिनों से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे थे। हालांकि, शुक्रवार को अपनी पढ़ाई को जारी रखने के लिए बच्चों ने जान जोखिम में डालकर घुटनों तक भरे पानी को पार किया। ग्रामीणों का कहना है कि बुधवार और गुरुवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद से ही रास्ते पर पानी जमा है, जिसकी निकासी के लिए अब तक कोई ठोस प्रबंध नहीं किए गए हैं।
पेयजल संकट और बदहाल व्यवस्था
बस्ती के निवासी पुष्पेंद्र साकेत ने बताया कि जलभराव के कारण केवल आवागमन ही बाधित नहीं हुआ है, बल्कि दैनिक जरूरतों को पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। स्थिति यह है कि गांव में लगे एकमात्र हैंडपंप तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। हैंडपंप के चारों ओर कीचड़ और दूषित पानी जमा होने से ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भी भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
- प्रभावित आबादी: बस्ती में करीब 80 लोग निवास करते हैं।
- समस्या का मुख्य कारण: जल निकासी के लिए उचित नालियों का अभाव।
- ग्रामीणों का आरोप: पक्की सड़क और नाली की मांग सालों से लंबित है।
प्रशासनिक उदासीनता और ग्रामीणों का आक्रोश
ग्रामीणों का आरोप है कि वे पिछले कई वर्षों से पक्की सड़क और जल निकासी के लिए नाली निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर साल बारिश के दौरान उन्हें इसी तरह की नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने शुक्रवार को सिहावल एसडीएम राकेश शुक्ला से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक प्रशासन की ओर से कोई सुध नहीं ली गई है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्थान | ग्राम पहाड़ी, सिहावल, सीधी |
| मुख्य समस्या | सड़क पर जलभराव और जल निकासी का अभाव |
| प्रभावित वर्ग | आदिवासी ग्रामीण और स्कूली छात्र |
इस पूरे मामले पर सिहावल एसडीएम राकेश शुक्ला ने कहा कि उन्हें अभी तक इस विषय में कोई औपचारिक जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे ही उन्हें लिखित आवेदन प्राप्त होगा, मामले की जांच की जाएगी और नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस आदिवासी बस्ती की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालता है।










