शिवपुरी में वायरल वीडियो का सच: हाथ में ड्रिप लगाकर बाइक पर मरीज को ले जाने का मामला
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से एक चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति को हाथ में ड्रिप लगी हालत में बाइक पर बैठाकर ले जाते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो के सामने आते ही जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। हालांकि, मामले की गहराई से पड़ताल करने पर पूरी सच्चाई सामने आई है, जो अस्पताल प्रशासन के दावों को पुख्ता करती है।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना बुधवार दोपहर की है, जब कोलारस थाना क्षेत्र के सरजापुर गांव के रहने वाले दयालू जाटव (50) और उनके बेटे राजेश जाटव के साथ जमीन विवाद को लेकर कुछ लोगों ने बेरहमी से मारपीट की। मारपीट में गंभीर रूप से घायल पिता-पुत्र को इलाज के लिए आनन-फानन में कोलारस स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया और एमएलसी (MLC) की प्रक्रिया पूरी करने के बाद दयालू जाटव की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें शिवपुरी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
एफआईआर के लिए थाने पहुंचे थे परिजन
इलाज के बीच में ही, भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं और परिजनों ने आरोपियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। वे घायल दयालू और राजेश को लेकर सीधे कोलारस थाना पहुंच गए। इस दौरान हुई देरी के बाद पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया:
- राकेश चौबे
- महेंद्र यादव
- गोलू यादव
- मुलायम यादव
- पर्वत यादव
एफआईआर दर्ज होने के बाद, परिजन कामता प्रसाद जाटव और गंगाराम जाटव ने एंबुलेंस का इंतजार करने के बजाय घायल दयालू जाटव को सीधे बाइक पर बिठाया और मेडिकल कॉलेज के लिए निकल पड़े। इसी दौरान राहगीरों ने उनका वीडियो बना लिया, जो बाद में इंटरनेट पर वायरल हो गया।
अधिकारियों ने दी सफाई
इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है।
| अधिकारी | बयान का मुख्य अंश |
|---|---|
| डॉ. संजय ऋषेश्वर (CMHO) | मरीज के लिए एंबुलेंस उपलब्ध थी, लेकिन परिजन खुद ही निजी वाहन से ले जाने की जिद कर रहे थे। |
| पुनीत बाजपेयी (थाना प्रभारी) | मारपीट का मामला दर्ज कर लिया गया है। अस्पताल की लापरवाही का आरोप बेबुनियाद है। |
अंत में, जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषेश्वर ने साफ तौर पर कहा कि वायरल वीडियो में दिख रही स्थिति अस्पताल की किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं है। यह पूरी तरह से परिजनों का निर्णय था कि वे मरीज को एंबुलेंस के बजाय बाइक से ले गए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मरीज को रेफर कर दिया था और एंबुलेंस की सुविधा भी दी गई थी।










