Mandsaur: पशुपतिनाथ मंदिर की दान पेटी से निकले 24 लाख और सोने-चांदी के गहने

मध्य प्रदेश के मंदसौर स्थित विश्व प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर की दान पेटियों को बुधवार को कड़ी सुरक्षा और पारदर्शिता के बीच खोला गया। मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, दान पेटियों से निकले चढ़ावे की गणना का कार्य सुबह से शुरू होकर देर शाम तक जारी रहा। गणना के पहले दिन ही मंदिर प्रशासन…

मंदसौर पशुपतिनाथ मंदिर: दान पेटियों से निकला खजाना, पहले दिन ही मिले 24 लाख रुपये

मध्य प्रदेश के मंदसौर स्थित विश्व प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर की दान पेटियों को बुधवार को कड़ी सुरक्षा और पारदर्शिता के बीच खोला गया। मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, दान पेटियों से निकले चढ़ावे की गणना का कार्य सुबह से शुरू होकर देर शाम तक जारी रहा। गणना के पहले दिन ही मंदिर प्रशासन को 24 लाख 2 हजार 450 रुपये की नकद राशि प्राप्त हुई है।

विदेशी मुद्राओं और कीमती आभूषणों का मिला भंडार

दान पेटियों की गणना के दौरान केवल भारतीय मुद्रा ही नहीं, बल्कि भारी मात्रा में कीमती वस्तुएं भी सामने आई हैं। प्रबंधन समिति ने जानकारी दी कि दान राशि के साथ-साथ सोने और चांदी के आभूषण भी बड़ी संख्या में मिले हैं। इसके अलावा, दान पात्रों से विभिन्न देशों की मुद्राएं भी बरामद हुई हैं, जो मंदिर की वैश्विक ख्याति को दर्शाती हैं।

  • नकद राशि: 24 लाख 2 हजार 450 रुपये।
  • विदेशी मुद्रा: नेपाल और ब्राजील सहित कई देशों के नोट।
  • अन्य चढ़ावा: सोने और चांदी के बहुमूल्य आभूषण।

धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बना पशुपतिनाथ मंदिर

दान पेटियों से प्राप्त विदेशी मुद्राओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बाबा पशुपतिनाथ के दरबार में केवल देश के ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी आस्था लेकर पहुंच रहे हैं। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, विदेशी मुद्रा की विस्तृत गणना और उनका मिलान गुरुवार को किया जाएगा। शेष दान राशि की गिनती का कार्य भी गुरुवार को पूरा कर लिया जाएगा।

विवरणस्थिति
प्रथम दिन की गणना24,02,450 रुपये
शेष गणनागुरुवार को पूर्ण होगी
विशेष आकर्षणनेपाल व ब्राजील की मुद्राएं

लगातार बढ़ रही दान राशि और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यह संकेत देती है कि मंदसौर का यह मंदिर अब देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित हो चुका है। बाबा पशुपतिनाथ के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा और मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता ने इसे एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है।