Sriganganagar: डेरा विवाद में पूर्व सरपंच का आरोप, महंत पर पेड़ काटने और तोड़फोड़ का केस

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के मुकलावा स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर डेरा बारुनाथ में इन दिनों विवाद गहरा गया है। डेरे के संचालक दीवाली नाथ पर धार्मिक स्थल की पवित्रता को नुकसान पहुंचाने, हरे-भरे पेड़ कटवाने और डेरे की संपत्ति पर अवैध कब्जा करने के गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और महंतों ने इस पूरे…

श्रीगंगानगर: शिव मंदिर डेरा बारुनाथ में विवाद, संचालक पर हरे पेड़ काटने और कब्जे के गंभीर आरोप

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के मुकलावा स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर डेरा बारुनाथ में इन दिनों विवाद गहरा गया है। डेरे के संचालक दीवाली नाथ पर धार्मिक स्थल की पवित्रता को नुकसान पहुंचाने, हरे-भरे पेड़ कटवाने और डेरे की संपत्ति पर अवैध कब्जा करने के गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और महंतों ने इस पूरे मामले को लेकर मोर्चा खोल दिया है और डेरे को संचालक के चंगुल से मुक्त कराने की मांग की है।

एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई की मांग

पूर्व सरपंच शकुंतला के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने रायसिंहनगर के एसडीएम पूनम चंद से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का आरोप है कि डेरा परिसर में पूजा-अर्चना के लिए लगाए गए हरे-भरे पेड़ों को बिना अनुमति कटवा दिया गया है। इसके साथ ही, डेरे की चारदीवारी को भी नुकसान पहुंचाया गया है। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि दीवाली नाथ को तत्काल हटाया जाए और डेरे का नियंत्रण महंत जीतनाथ को सौंपा जाए।

विवाद का मुख्य ब्यौरा

विषयविवरण
स्थानमुकलावा, श्रीगंगानगर
आरोपीसंचालक दीवाली नाथ
प्रमुख आरोपपेड़ कटाई, अवैध कब्जा, तोड़फोड़
मांगमहंत जीतनाथ को कब्जा सौंपना

पूर्व सरपंच ने दी चेतावनी, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की उम्मीद

इस मामले पर मुकलावा की पूर्व सरपंच शकुंतला ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि दो साल पहले स्वयं महंत जीतनाथ ने ही दीवाली नाथ को डेरे की सेवा के लिए नियुक्त किया था, लेकिन अब वही व्यक्ति डेरे पर अवैध रूप से काबिज हो गया है। उन्होंने कहा कि दीवाली नाथ की कई संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी सामने आई है, जिसे लेकर एसडीएम को अवगत करा दिया गया है।

  • प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
  • ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन और धरना देने के लिए मजबूर होंगे।

फिलहाल, स्थानीय प्रशासन इस संवेदनशील मामले की जांच में जुट गया है, ताकि मंदिर की मर्यादा और शांति व्यवस्था को बनाए रखा जा सके।