CAG रिपोर्ट: जल जीवन मिशन के 33% नल कनेक्शन बंद, कागजों में सिमटी योजना

छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'जल जीवन मिशन' (JJM) की हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट ने राज्य में पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा विधानसभा में पेश की गई इस रिपोर्ट में…

छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की पोल खुली: CAG रिपोर्ट में 33 फीसदी नल कनेक्शन बंद, हर घर जल का दावा फेल

छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) की हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट ने राज्य में पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा विधानसभा में पेश की गई इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कागजों में जल टंकियों के वितरण के बड़े दावे किए गए, लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद निराशाजनक है। रिपोर्ट के मुताबिक, मिशन के तहत लगाए गए 33% नल कनेक्शन पूरी तरह से बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में पानी की भारी किल्लत बरकरार है।

CAG रिपोर्ट के मुख्य बिंदु और खामियां

  • 33% नल कनेक्शन बेकार: मार्च 2025 तक 40.10 लाख कनेक्शन लगाए गए, जिनमें से 13.31 लाख कनेक्शन ‘फंक्शनल’ नहीं हैं।
  • प्रमाणन में विफलता: राज्य के 19,656 गांवों में से केवल 716 गांव ही ‘हर घर जल’ प्रमाणित हो पाए हैं।
  • योजनाओं की सुस्ती: 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक मात्र 172 योजनाएं पूरी हुईं।
  • मल्टी-विलेज स्कीम: स्वीकृत 70 मल्टी-विलेज योजनाओं में से एक भी परियोजना अब तक पूर्ण नहीं हो सकी है।

योजना में नियोजन की कमी और खराब निगरानी

CAG की रिपोर्ट में बताया गया है कि मिशन की विफलता का सबसे बड़ा कारण योजना बनाने में बरती गई लापरवाही है। न तो गांव स्तर पर कार्ययोजना बनी और न ही राज्य स्तर पर जल सुरक्षा की कोई ठोस रणनीति तैयार की गई। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि गलत रिपोर्टिंग और निगरानी के अभाव ने ग्रामीण पेयजल आपूर्ति की दीर्घकालिक स्थिरता को खतरे में डाल दिया है। जल स्रोतों के सूखने और बिजली कनेक्शन के अभाव में बड़ी संख्या में नल कनेक्शन बेअसर साबित हो रहे हैं।

प्रमुख आंकड़ों पर एक नजर

विवरणआंकड़े/स्थिति
कुल गांव19,656
‘हर घर जल’ प्रमाणित गांव716 (3.64%)
गैर-कार्यशील नल कनेक्शन33%
NABL मान्यता प्राप्त लैबकुल लैब का केवल 63%

पानी की गुणवत्ता पर गंभीर खतरा

जल जीवन मिशन के तहत पानी की शुद्धता की जांच करना अनिवार्य है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार राज्य की 75 प्रयोगशालाओं में से केवल 4 ही सभी 13 मानकों की जांच करने में सक्षम हैं। इसके अलावा, 37% प्रयोगशालाएं NABL से मान्यता प्राप्त नहीं हैं, जो आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ को दर्शाता है। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी पानी की गुणवत्ता की जांच मानकों के अनुरूप नहीं की जा रही है।

सरकार का पक्ष: कांग्रेस पर निशाना, भविष्य की रणनीति

इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने पिछली कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद कार्यों में गति आई है। साव ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने मिशन की अवधि 2028 तक बढ़ा दी है और अब मार्च 2026 से दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ पेयजल की पहुंच सुनिश्चित हो सके।

CAG ने अपनी रिपोर्ट में सरकार को सलाह दी है कि वह NABL प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाए, सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करे और लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करे। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इन सिफारिशों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाती है।