लखनऊ: बेसिक शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए बड़ी राहत, पेंशन प्रक्रिया हुई आसान
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को एक बड़ी सौगात दी है। राज्य सरकार ने पेंशन स्वीकृति की जटिल प्रक्रिया को सरल बनाते हुए नए निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार, अब सेवानिवृत्त अधिकारियों को अपनी पेंशन पाने के लिए लंबी कागजी प्रक्रियाओं से नहीं जूझना पड़ेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बेसिक शिक्षा (सामान्य शिक्षा संवर्ग) के समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों की पेंशन प्रक्रिया में ‘अदेयता प्रमाण-पत्र (No Dues Certificate)’ अब कोई बाधा नहीं बनेगा। पहले इस प्रमाणपत्र के अभाव में पेंशन से जुड़े लाभों को रोक दिया जाता था, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था।
आंतरिक प्रक्रिया से होगा समाधान
नए नियमों के तहत, विभाग अब ‘नो ड्यूज’ के नाम पर किसी अधिकारी की पेंशन नहीं रोकेगा। इसके स्थान पर, विभागाध्यक्ष या कार्यालयाध्यक्ष स्तर पर आंतरिक प्रक्रिया के माध्यम से सत्यापन पूरा किया जाएगा। यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित नहीं है और न ही उन पर वित्तीय अनियमितता का कोई गंभीर आरोप है, तो उनके सेवानिवृत्तिक लाभों का निपटारा एक निश्चित समय सीमा के भीतर करना अनिवार्य होगा।
नियमों में मुख्य बदलाव
| प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| पेंशन स्वीकृति | अदेयता प्रमाण-पत्र (No Dues) के कारण नहीं रोकी जाएगी। |
| लागू वर्ग | बेसिक शिक्षा (सामान्य शिक्षा संवर्ग) के समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारी। |
| निस्तारण | विभागीय जांच न होने की स्थिति में समयबद्ध तरीके से लाभ मिलेंगे। |
गंभीर मामलों में जारी रहेगी जांच
शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह राहत उन अधिकारियों के लिए नहीं है, जिन पर गंभीर आरोप हैं। जिन अधिकारियों के विरुद्ध वित्तीय अनियमितता, सरकारी धन की हानि या अन्य गंभीर मामलों में विभागीय कार्रवाई पहले से लंबित है, उनके मामले में 28 जुलाई 1989 के शासनादेश के अनुसार ही कार्रवाई जारी रहेगी।
अपर मुख्य सचिव ने शिक्षा निदेशक को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे सभी लंबित मामलों की समीक्षा करें और जो अधिकारी पात्र हैं, उन्हें बिना किसी देरी के पेंशन और अन्य सेवानिवृत्तिक लाभ प्रदान करना सुनिश्चित करें। सरकार के इस निर्णय से बेसिक शिक्षा विभाग के सैकड़ों सेवानिवृत्त अधिकारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।









