सतना जिला पंचायत में मचा घमासान: भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों के बीच सदस्यों का हल्ला बोल
मध्य प्रदेश के सतना जिले में जिला पंचायत कार्यालय के बाहर सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब नाराज जिला पंचायत सदस्यों ने भ्रष्टाचार और पक्षपात के विरोध में मोर्चा खोल दिया। सदस्यों ने जिला पंचायत सीईओ के कार्यालय के सामने जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी सदस्यों ने जिला पंचायत अध्यक्ष और उनके करीबियों पर सरकारी धन के दुरुपयोग का बड़ा आरोप लगाया है।
चार वर्षों से जारी भ्रष्टाचार का आरोप
प्रदर्शन कर रहे सदस्यों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) शैलेंद्र सिंह को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि पिछले चार वर्षों से जिला पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। सदस्यों का आरोप है कि DMF मद, 15वें वित्त आयोग और 5वें वित्त आयोग की राशि का आवंटन नियमों को ताक पर रखकर किया गया है।
भेदभाव का शिकार हुए कई क्षेत्र
सदस्यों ने आरोप लगाया है कि जिला पंचायत में चहेते लोगों को करोड़ों रुपये की राशि बांटी गई, जबकि अन्य सदस्यों के वार्डों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इस भेदभावपूर्ण रवैये के कारण अधिकांश सदस्य अब जिला पंचायत की सामान्य सम्मेलन बैठकों का बहिष्कार करने पर मजबूर हैं।
| विवरण | आरोप की प्रकृति |
|---|---|
| वित्तीय अनियमितता | DMF और वित्त आयोग की राशि में धांधली |
| पक्षपात | खास सदस्यों के क्षेत्रों में करोड़ों का आवंटन, बाकियों की अनदेखी |
| असंतोष | विकास कार्यों में भेदभाव के कारण बैठकों से दूरी |
आंकड़ों में समझें भेदभाव का गणित
ज्ञापन में उदाहरण देते हुए बताया गया है कि वार्ड क्रमांक 08 के लिए 52 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया। भेदभाव का शिकार हुए प्रमुख सदस्यों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- जानवी यादव
- लक्ष्मी मवासी
- पूजा गुर्जर
- विमला कोल
- एकता सिंह
- मंजू लता सिंह
- सावित्री त्रिपाठी
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
सदस्यों ने सीईओ से मांग की है कि आगामी सामान्य सम्मेलन की बैठक से पहले पिछले चार वर्षों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए। सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके क्षेत्रों के साथ हुए भेदभाव और भ्रष्टाचार की जांच निष्पक्ष रूप से नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और अधिक उग्र करेंगे। फिलहाल, इस प्रदर्शन के बाद से जिला पंचायत के गलियारों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है और अब सबकी नजरें प्रशासन द्वारा दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।










